विजया एकादशी 2026: सिर्फ उपवास नहीं, हरि-स्मरण के बिना अधूरा है व्रत, जानिए गरुड़ पुराण का संदेश

विष्णु भक्तों के लिए एकादशी का व्रत विशेष महत्व रखता है। इसे साल के सबसे पवित्र व्रतों में गिना जाता है। हालांकि अधिकांश लोग एकादशी को केवल अन्न त्याग और उपवास तक सीमित समझ लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार यह व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है। विजया एकादशी 2026 के अवसर पर आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण इस व्रत के बारे में क्या कहता है और कौन-सा एक काम है जिसके बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

गरुड़ पुराण में एकादशी का महत्व

गरुड़ पुराण के अनुसार एकादशी का वास्तविक उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन और आत्मा को भगवान विष्णु से जोड़ना है। जो व्यक्ति केवल उपवास करता है लेकिन हरि-स्मरण नहीं करता, उसका व्रत पूर्ण फल नहीं देता। इसी कारण एकादशी को “हरि-व्रत” कहा गया है।

वो एक काम जो है सबसे जरूरी

शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु का नाम जपना, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना या हरि कथा सुनना अत्यंत आवश्यक है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार बिना हरि-स्मरण के रखा गया व्रत अधूरा और फलहीन हो जाता है।

भगवान विष्णु क्या देखते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु भक्त की भूख नहीं, बल्कि उसका भाव देखते हैं। यदि व्यक्ति दिनभर उपवास रखे लेकिन मन में क्रोध, ईर्ष्या, लोभ या नकारात्मकता हो, तो व्रत की आत्मा नष्ट हो जाती है। एकादशी का असली उद्देश्य मन को शांत, पवित्र और भगवान में स्थिर करना है।

एकादशी की रात का विशेष महत्व

गरुड़ पुराण में एकादशी की रात को अत्यंत पवित्र बताया गया है। इस रात जागरण, भजन-कीर्तन और हरि नाम संकीर्तन करने से पूर्व जन्मों के पाप भी क्षीण होते हैं। इसलिए केवल दिनभर का उपवास पर्याप्त नहीं, बल्कि रात में भी ईश्वर स्मरण आवश्यक है।

संयम और शुद्ध आचरण भी जरूरी

एकादशी पर केवल फलाहार करना ही पर्याप्त नहीं है। इस दिन वाणी पर संयम, आचरण में शुद्धता और मन पर नियंत्रण रखना भी उतना ही जरूरी है। सांसारिक विवादों और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर दिन को भगवान विष्णु की भक्ति में समर्पित करना ही व्रत का सार है।

गरुड़ पुराण का स्पष्ट संदेश

गरुड़ पुराण का संदेश साफ है—एकादशी पेट से नहीं, चेतना से रखी जाती है। यदि हरि-स्मरण नहीं हुआ, तो कठिन से कठिन उपवास भी अधूरा माना जाएगा। विजया एकादशी 2026 पर भक्त यदि इन नियमों का पालन करें, तो उन्हें व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो सकता है।

 

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