वाराणसी (उ०प्र०) : एन०जी०टी० ने पर्यावरणीय क्षति मामले में उ०प्र० सरकार से पूछा – टेंट कंपनियों से अब तक क्यों नहीं वसूली गई जुर्माने की राशि!
मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को। उ०प्र० सरकार ने एन०जी०टी० से मांगा समय। वाराणसी टेंट सिटी पर लगा 34.25 लाख का जुर्माना अब तक नहीं वसूला....
- रिपोर्ट: सुकेश पांडेय
वाराणसी। गंगा किनारे टेंट सिटी से पर्यावरण को हुए नुकसान के मामले में जुर्माना वसूलने में लापरवाही पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन०जी०टी०) ने मंगलवार को सुनवाई की। उ०प्र० सरकार से जब एन०जी०टी० ने जुर्माना वसूली की स्थिति पूछी तो राज्य सरकार ने अतिरिक्त समय की मांग की। करीब सात मिनट तक चली सुनवाई के बाद एन०जी०टी० ने अगली तारीख 8 अक्टूबर तय कर दी।
34.25 लाख का जुर्माने की अब तक नहीं वसूली राशि
एन०जी०टी० ने 30 अक्टूबर 2023 को आदेश दिया था कि टेंट सिटी संचालक कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाए। इसके बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यू०पी०पी०सी०बी०) ने 23 नवंबर 2023 को दोनों कंपनियों – लल्लू जी एंड संस और प्रवेग कम्युनिकेशन इंडिया लिमिटेड पर कुल 34.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। दोनों कंपनियों पर 17.12 लाख-17.12 लाख रुपये का जुर्माना ठोका गया।
लल्लू जी एंड संस ने कटेसर स्थित टेंट सिटी ‘निरान’ में 120 टेंट लगाए थे, जो साढ़े चार महीने तक चले और 30 जुलाई को हटाए गए।
प्रवेग कम्युनिकेशन इंडिया लिमिटेड ने 140 टेंट लगाए थे।
याचिकाकर्ता तुषार गोस्वामी की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने एन०जी०टी० में दलील दी कि जुर्माने की वसूली क्यों नहीं की गई और साथ ही सवाल उठाया कि कछुआ सेंचुरी मामले में एनजीटी को सुनवाई का अधिकार है या नहीं। तीन सदस्यीय पीठ – चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ सदस्य डॉ० ए० सेंथिल वेल और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की बेंच ने दोनों बिंदुओं पर सुनवाई की।
इससे पहले वाराणसी डी०एम० ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि टेंट सिटी मौजा कटेसर में लगी थी, जो चंदौली जिले में आता है। इसलिए वसूली की जिम्मेदारी चंदौली डी०एम० की है। वाराणसी डी०एम० ने 26 जुलाई को इस संबंध में चंदौली डी०एम० को पत्र भी भेजा था।
अब याची अधिवक्ता ने मंगलवार को चंदौली डी०एम० को फिर से पत्र लिखकर यू०पी०पी०सी०बी० के आदेशानुसार जुर्माना वसूलने की अपील की है।
