नई दिल्ली, 14 फरवरी 2026 : दुनियाभर सहित भारत में आज 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रेमी जोड़े, पति-पत्नी और युवा एक-दूसरे को उपहार देकर अपने भाव व्यक्त करते हैं। बाजार, मॉल और रेस्टोरेंट में भी इस दिन को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
हालांकि, सनातन परंपरा में 14 फरवरी को प्रेम दिवस के रूप में मनाने को लेकर अलग मान्यताएं भी सामने आई हैं। धार्मिक कथावाचक पुंडरीक महाराज के अनुसार, सनातन धर्म में प्रेम के उत्सव के लिए आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, यानी शरद पूर्णिमा को अधिक उपयुक्त माना गया है। इस दिन चंद्रमा की विशेष कृपा और आध्यात्मिक महत्व होने के कारण इसे प्रेम और समर्पण का प्रतीक दिवस बताया गया है।
संत वैलेंटाइन की स्मृति में मनाया जाता है यह दिन
इतिहास के अनुसार, वैलेंटाइन डे संत वैलेंटाइन की स्मृति में मनाया जाता है। धीरे-धीरे यह दिन वैश्विक स्तर पर प्रेम और संबंधों के उत्सव के रूप में स्थापित हो गया। भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में इस दिन का महत्व तेजी से बढ़ा है।
सनातन परंपरा में अलग-अलग संबंधों के लिए अलग तिथियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सनातन धर्म में विभिन्न संबंधों को समर्पित अलग-अलग पर्व बताए गए हैं—
महाशिवरात्रि को परम पिता के रूप में भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है।
नवरात्रि के दिनों को मां शक्ति, यानी मां दुर्गा की उपासना का पर्व माना जाता है, जिसे मातृत्व के सम्मान से भी जोड़ा जाता है।
वहीं मित्रता के संदर्भ में हनुमान जी द्वारा भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता स्थापित करने की कथा को आदर्श उदाहरण माना जाता है।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
विशेषज्ञों का मानना है कि वैलेंटाइन डे आज एक सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव बन चुका है, जबकि सनातन परंपरा में प्रेम, समर्पण और संबंधों के सम्मान के लिए वर्षभर विभिन्न धार्मिक पर्व निर्धारित हैं।
इस प्रकार, जहां एक ओर आधुनिक समाज 14 फरवरी को प्रेम दिवस के रूप में मना रहा है, वहीं सनातन परंपरा में प्रेम और संबंधों को अलग-अलग धार्मिक तिथियों से जोड़कर सम्मानित करने की मान्यता भी प्रचलित है।
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