इंटर-डिस्ट्रिक्ट यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत प्रयागराज के युवाओं ने किया रामपुर रज़ा पुस्तकालय का शैक्षिक भ्रमण
रामपुर। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित मेरा युवा भारत (MY Bharat) के इंटर-डिस्ट्रिक्ट यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत प्रयागराज से आए युवाओं के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविख्यात रामपुर रज़ा पुस्तकालय का शैक्षिक भ्रमण किया।
इस दौरान प्रतिभागियों को रामपुर रज़ा पुस्तकालय के समृद्ध इतिहास, दुर्लभ पांडुलिपियों, बहुभाषिक संग्रह तथा सांस्कृतिक विरासत के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंतर्गत पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र का विशेष व्याख्यान भी आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने युवाओं को ज्ञान, शोध और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में डॉ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि युवाओं का रामपुर रज़ा पुस्तकालय के प्रांगण में आगमन पुस्तकालय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने प्रख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर के कथन “जिधर जवानी चढ़ती है, उधर जमाना चलता है” का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज और देश की दिशा तय करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने बताया कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय की स्थापना 7 अक्टूबर 1774 को रामपुर रियासत के नवाब फैजुल्लाह खान द्वारा की गई थी और आज इसकी स्थापना को 251 वर्ष पूरे हो चुके हैं। समय-समय पर नवाबों ने इस पुस्तकालय के संग्रह को समृद्ध किया, जिसके कारण आज यहां 21 से अधिक भाषाओं में पांडुलिपियाँ और मुद्रित पुस्तकें उपलब्ध हैं।
डॉ. मिश्र ने बताया कि पुस्तकालय की तीन दुर्लभ पांडुलिपियों को भारत सरकार के राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा भारत की धरोहर घोषित किया गया है। इनमें 7वीं शताब्दी की कूफी लिपि में लिखी अल-कुरआन की पांडुलिपि, 258 लघुचित्रों से सुसज्जित वाल्मीकि रामायण का फारसी अनुवाद तथा पंचतंत्र पर आधारित कलीला व दिमना की चित्रित पांडुलिपि शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पुस्तकालय का भवन 1905 में निर्मित हुआ था और इसकी आठ मीनारें विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के प्रतीक स्वरूप हैं, जो इसे एक बहुसांस्कृतिक संस्थान के रूप में स्थापित करती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर से शोधकर्ता यहां अध्ययन और शोध के लिए आते हैं और पुस्तकालय को विश्वस्तरीय अध्ययन एवं अनुवाद संस्थान के रूप में विकसित करने के प्रयास जारी हैं।
भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने पुस्तकालय के विभिन्न अनुभागों, दुर्लभ संग्रह और संग्रहालय का अवलोकन किया तथा इसके बौद्धिक और सांस्कृतिक महत्व को समझा।
युवाओं ने इस भ्रमण को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए रामपुर रज़ा पुस्तकालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
