अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से नहीं होता मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा: अध्ययन में खुलासा
अध्ययन का निष्कर्ष: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन मेटाबोलिक सिंड्रोम से सीधे नहीं जुड़ा
नई दिल्ली: एक नए यूरोपीय अध्ययन में पाया गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPF) का सेवन भले ही डाइट की गुणवत्ता को प्रभावित करता हो, लेकिन यह मेटाबोलिक सिंड्रोम की संभावना को सीधे तौर पर नहीं बढ़ाता। यह निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल Nutrients में प्रकाशित हुआ है।
पृष्ठभूमि: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और बदलती जीवनशैली
हाल के दशकों में तैयार खाने और पैकेज्ड फूड्स का चलन तेजी से बढ़ा है। इसमें प्रिज़र्वेटिव, फ्लेवर, एडिटिव्स जैसी चीजें भरपूर होती हैं, जो इनकी स्वाद, शेल्फ लाइफ और सुविधा बढ़ाने में मदद करती हैं।
इनमें सैचुरेटेड फैट, चीनी और नमक की मात्रा अधिक होती है जबकि प्रोटीन, फाइबर और आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है।
अध्ययन कैसे हुआ?
- डेटा स्रोत: 2013–2014 के बीच हुए I.Family स्टडी के तहत 8 यूरोपीय देशों के 2,285 प्रतिभागियों का डेटा लिया गया।
- प्रतिभागी वर्ग: 147 बच्चे, 645 किशोर और 1,493 वयस्क शामिल थे।
- खाद्य मूल्यांकन: 24-घंटे के डायटरी रीकॉल के माध्यम से UPF का सेवन मापा गया।
- स्वास्थ्य मूल्यांकन: बच्चों व किशोरों के लिए मेटाबोलिक ज़-स्कोर का उपयोग किया गया जबकि वयस्कों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर मेटाबोलिक सिंड्रोम तय किया गया।
मुख्य निष्कर्ष
- बच्चों, किशोरों और वयस्कों में क्रमशः 48%, 47% और 40% ऊर्जा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से आ रही थी।
- ज्यादा UPF सेवन करने वालों में चीनी, फैट और कुल ऊर्जा की मात्रा अधिक थी जबकि प्रोटीन और फाइबर की मात्रा कम पाई गई।
- मेटाबोलिक सिंड्रोम या उसके किसी भी घटक (जैसे हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, हाई ग्लूकोज आदि) के साथ कोई स्पष्ट और महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।
अध्ययन का महत्व
- यह अध्ययन दर्शाता है कि UPF का सेवन सीधे तौर पर मेटाबोलिक सिंड्रोम का कारण नहीं बनता है, खासकर विविध सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले यूरोपीय लोगों में।
- हालांकि, चूंकि यह एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन था (एक समयबिंदु पर मूल्यांकन), इसलिए इससे कारण और परिणाम का निर्धारण नहीं किया जा सकता।
क्यों अलग है यह निष्कर्ष?
- पिछले कई अध्ययनों ने UPF के सेवन को मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों से जोड़ा है।
- विभिन्न अध्ययनों में डायटरी मूल्यांकन के तरीके, कल्चर, और डिफिनिशन में भिन्नता के कारण निष्कर्ष अलग हो सकते हैं।
भविष्य की सिफारिशें
- पब्लिक हेल्थ पॉलिसी में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के कम सेवन और स्वस्थ खानपान को प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
- पोषण शिक्षा में ताज़ा व न्यूनतम प्रोसेस्ड फूड्स को बढ़ावा देना चाहिए।
- आयु के साथ UPF का सेवन घटता है, इसलिए युवाओं में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता अधिक है।
सीमाएं और आगे की दिशा
- अध्ययन में कुछ प्रतिभागियों को बाहर करना पड़ा, जिससे सैंपल साइज कम हुआ और जनरलाइजेशन पर असर पड़ा।
- शारीरिक गतिविधि, जेनेटिक प्रवृत्ति, और पर्यावरणीय कारक जैसे महत्वपूर्ण कंफाउंडर्स को शामिल नहीं किया गया।
- शोधकर्ताओं ने माना कि अगर कोई संबंध है भी, तो वह कमजोर हो सकता है या अन्य अज्ञात कारणों से प्रभावित।
हालांकि UPF सीधे तौर पर मेटाबोलिक सिंड्रोम नहीं बढ़ाता, लेकिन इसके सेवन से आहार की गुणवत्ता जरूर प्रभावित होती है। इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार की आदतों को बढ़ावा देना ज़रूरी है, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में।
