बिलासपुर में जाटव समाज के युवकों पर हमले की दो घटनाएं, एसपी रामपुर की सख्त कार्रवाई से मिला न्याय
दबंगों की संपत्तियों पर चला बुलडोजर, समाज ने जताया आभार; एडीजी बरेली को भेजी गई शिकायत पत्र की प्रति
रामपुर। तहसील बिलासपुर, जिला रामपुर में जाटव समाज के दो युवकों पर हुए जानलेवा हमले और पुलिस की कथित लापरवाही के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए अखिल भारतीय जाटव महासभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश कुमार सागर ने श्रीमान अपर पुलिस महानिदेशक, बरेली जोन को शिकायती पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पत्र में दो गंभीर घटनाओं का उल्लेख किया गया है जिनके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं।
पहली घटना 7 जुलाई 2025 को रात करीब 8 बजे हुई, जब ग्राम मैसिया ज्वालापुर निवासी सुमित पुत्र हर प्रसाद को सर्वसंस्कृति स्कूल के पास घात लगाए बदमाशों ने रोका और लाठी-डंडों से मारपीट की। सुमित से मोटरसाइकिल (UP22 BC 7534), मोबाइल और ₹40,000 नकद लूट लिए गए। थाने पर जाने के बाद हल्का दरोगा ने न रिपोर्ट दर्ज की, न मेडिकल कराया, उल्टा पीड़ित को धमकी देकर घर भेज दिया गया।
दूसरी घटना 8 जुलाई की सुबह हुई जब भैसिया ज्वालापुर निवासी सूरज कुमार को कुछ दबंगों ने जातिसूचक शब्द कहकर बुरी तरह पीटा। सूरज को गंभीर हालत में जिला अस्पताल से रुद्रपुर रेफर किया गया, जहां उसका एमआरआई और सिटी स्कैन हुआ। घटना का वीडियो भी एक आरोपी द्वारा वायरल किया गया है।
इन मामलों में प्रभारी निरीक्षक बलवंत सिंह और उपनिरीक्षक पी.के. शर्मा पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने पीड़ित पक्ष पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और रिपोर्ट दर्ज करने में टालमटोल की।
प्रदेश अध्यक्ष ने एडीजी से मांग की है कि निष्पक्ष जांच के लिए उक्त अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।
एसपी रामपुर की तत्परता से मिला न्याय:
जैसे ही यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आया, एसपी रामपुर ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों की दुकानों और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलवाया। इस साहसिक और निष्पक्ष कार्रवाई के लिए जाटव समाज ने एसपी महोदय का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें “जनहितैषी अधिकारी” बताया।
प्रदेश अध्यक्ष महेश कुमार सागर ने कहा,
“एसपी साहब ने जिस तत्परता से दबंगों पर कार्रवाई की, वह सराहनीय है। जाटव समाज उनके इस न्यायपूर्ण कदम का हमेशा ऋणी रहेगा। ऐसे ही अधिकारियों को जिले में तैनात किया जाना चाहिए, जो बिना पक्षपात के काम करें।”
समाज ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, पीड़ितों को सुरक्षा दी जाए, और दोषियों को कठोर दंड मिले।
