पंजाब बाढ़ में बहकर पाकिस्तान पहुंचे तीन भारतीय 30 महीने बाद लौटे, कैद और यातना की सुनाई दर्दनाक कहानी

फिरोजपुर।पंजाब में जुलाई 2023 की भीषण बाढ़ के दौरान सतलुज नदी के तेज बहाव में बहकर पाकिस्तान पहुंच गए तीन भारतीय नागरिकों—जोगिंदर सिंह, गुरमेज सिंह और छिंदर सिंह—को करीब 30 महीने बाद रिहा कर भारत वापस लौटा दिया गया है। अपने घर लौटने के बाद तीनों ने पाकिस्तान में बिताए कठिन समय और यातनाओं की दर्दनाक कहानी सुनाई।

सतलुज नदी के तेज बहाव में बहकर पहुंचे पाकिस्तान

तीनों व्यक्ति फिरोजपुर जिले के सतलुज नदी किनारे बसे गांव किलचे के निवासी हैं। जुलाई 2023 में आई भीषण बाढ़ के दौरान सतलुज नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और तेज बहाव उन्हें बहाकर पाकिस्तान की सीमा में ले गया। उस समय उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वे सीमा पार कर चुके हैं।

पाकिस्तान में हिरासत, मारपीट और जेल में कैद

बीबीसी हिंदी से बातचीत में तीनों ने बताया कि पाकिस्तान पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उन्हें बैठाया और पुलिस को बुलाया। पुलिस ने उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी और हिरासत में लेकर कई दिनों तक पूछताछ और मारपीट की।

उन्होंने बताया कि पुलिस को विश्वास दिलाने में काफी समय लगा कि वे जासूस नहीं बल्कि बाढ़ में बहकर पहुंचे हैं। इसके बाद उन्हें पहले कसूर जेल और फिर लाहौर जेल में अलग-अलग रखा गया। गिरफ्तारी के लगभग 15 महीने बाद उन्हें पहली बार अपने परिवार से बात करने की अनुमति मिली।

घर लौटने की उम्मीद भी छोड़ चुके थे

तीनों ने बताया कि लंबे समय तक जेल में रहने के कारण उन्होंने घर लौटने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। जोगिंदर सिंह, गुरमेज सिंह और छिंदर सिंह ने कहा कि एक दिन अचानक उन्हें बताया गया कि उन्हें रिहा किया जा रहा है, जिसे सुनकर उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ।

जांच के बाद BSF से संपर्क कर वापसी

सीमा पार पहुंचने वाले लोगों की वहां की सुरक्षा एजेंसियां पूरी जांच करती हैं। जांच पूरी होने के बाद उन्हें वापस भेजने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) से संपर्क किया जाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती और जांच पूरी होने में महीनों या वर्षों का समय लग सकता है।

2023 और 2025 की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

पंजाब में 2023 की बाढ़ में पटियाला, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब सहित कई जिलों में भारी नुकसान हुआ था। लगभग 2 लाख एकड़ धान की फसल डूब गई थी और कुल नुकसान ₹1,000 से ₹3,000 करोड़ के बीच आंका गया था।

वहीं, 2025 में आई बाढ़ 1988 के बाद सबसे विनाशकारी मानी गई। इसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई, 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए और 2 लाख हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो गई।

तीनों व्यक्तियों की सुरक्षित वापसी से उनके परिवारों में खुशी का माहौल है, वहीं यह घटना सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ के खतरों की गंभीरता को भी दर्शाती है।

 

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