मोक्ष का द्वार कहलाता है भगवान शिव का यह अद्भुत मंदिर, दर्शन मात्र से मिलती है जन्म–मृत्यु के चक्र से मुक्ति
देवों के देव महादेव स्वयं मोक्ष के दाता माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की कृपा से ही मनुष्य को जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति प्राप्त होती है। हिंदू धर्म में शिव उपासना को सबसे श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि उनकी शरण में जाने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान शिव के देशभर में अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन कुछ ऐसे विशेष मंदिर भी हैं जिन्हें मोक्ष का द्वार कहा जाता है। इन्हीं में से एक है दक्षिण भारत का प्रसिद्ध अन्नामलैयार मंदिर।
मोक्ष का द्वार कहलाता है यह मंदिर
हिंदू पुराणों में बताया गया है कि पृथ्वी और मानव शरीर पंचतत्वों—अग्नि, वायु, जल, आकाश और पृथ्वी—से बने हैं। इन पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले भगवान शिव के पांच प्रमुख मंदिर दक्षिण भारत में स्थित हैं। तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में स्थित अरुलमिगु अन्नामलैयार मंदिर पंचभूतों में ‘अग्नि तत्व’ का प्रतिनिधित्व करता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव के दर्शन और आराधना करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस मंदिर को मोक्ष का द्वार कहा जाता है।
अद्भुत ऊर्जा और दिव्यता का अनुभव
अन्नामलैयार मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा अन्य मंदिरों से अलग मानी जाती है। भक्तों का कहना है कि यहां प्रवेश करते ही एक विशेष सकारात्मक और शक्तिशाली अनुभूति होती है। भगवान शिव का यह स्वरूप भक्तों को मानसिक शांति के साथ-साथ आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है।
वास्तुकला और बनावट है आकर्षण का केंद्र
मंदिर की वास्तुकला अत्यंत भव्य और दर्शनीय है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी की तलहटी में स्थित है और दक्षिण द्रविड़ वास्तुकला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह मंदिर भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में शामिल है। मंदिर में चार विशाल प्रवेश द्वार हैं और परिसर के भीतर अन्नामलैयार तथा उन्नामुलई अम्मन के प्रमुख मंदिर स्थित हैं। विजयनगर काल में निर्मित हजार खंभों वाला हॉल भी यहां विशेष आकर्षण का केंद्र है।
इतिहास और शिल्पकला की अनूठी झलक
मंदिर का प्रारंभिक निर्माण 9वीं शताब्दी में चोल राजाओं के काल में हुआ था, बाद में होयसला वंश के शासकों ने इसका विस्तार कराया। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर चोल और होयसला काल की बारीक नक्काशी और मूर्तिकला आज भी देखने को मिलती है। स्तंभों पर उकेरी गई देवी-देवताओं की छोटी-छोटी प्रतिमाएं मंदिर की भव्यता को और बढ़ा देती हैं।
चमत्कारी है अन्नामलैयार मंदिर
मान्यता है कि अन्नामलैयार मंदिर में विराजमान शिवलिंग स्वयंभू है। कहा जाता है कि इसके दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जन्म–मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है। भगवान शिव के इस स्वरूप के दर्शन से रोग, दुख और मानसिक परेशानियां दूर होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
धार्मिक आस्था रखने वाले भक्तों के लिए अन्नामलैयार मंदिर न केवल एक तीर्थस्थल है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति का पवित्र द्वार भी माना जाता है।
डिस्क्लेमर- यहां दी गई जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। khabrejunction.com इनकी पुष्टि नहीं करता।
