‘यह छुट्टी नहीं है’: फैमिली पॉलिसी पर बोले गौतम गंभीर, रोहित-विराट की नाराज़गी पर दी प्रतिक्रिया

BCCI की सख्त पॉलिसी पर विराट-रोहित नाराज़, गंभीर ने दी सफाई

नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया में भारत की 1-3 से हार के बाद जब गौतम गंभीर का कोचिंग कार्यकाल खत्म हुआ, तब बीसीसीआई ने एक 10 बिंदुओं की सख्त गाइडलाइन लागू कर दी। इसमें खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना, निजी स्टाफ पर रोक और सबसे ज्यादा विवादास्पद — परिवार के साथ यात्रा करने पर प्रतिबंध शामिल था।

खिलाड़ियों की नाराज़गी, रोहित ने बातचीत में जताई चिंता
परिवार को लेकर बनी नई नीति कई सीनियर खिलाड़ियों को रास नहीं आई।
रोहित शर्मा, भारतीय कप्तान, चयन समिति अध्यक्ष अजित अगरकर से बात करते हुए बोले: “अब तो और एक-डेढ़ घंटा बैठना पड़ेगा इसके बाद, फैमिली वाली चीजें डिस्कस करनी हैं, सब लोग मुझसे कह रहे हैं…”
यह साफ करता है कि टीम के अंदर इस पॉलिसी को लेकर असहमति है।

गंभीर ने चुप्पी तोड़ी, कहा – ‘देश सर्वोपरि है’
गौतम गंभीर, जिन पर इस नीति को लेकर आरोप लगाए गए, ने चेतेश्वर पुजारा के साथ बातचीत में कहा: “फैमिली ज़रूरी है, लेकिन आपको समझना होगा कि आप यहां घूमने नहीं, मकसद से आए हैं। बहुत कम लोगों को यह मौका मिलता है कि वे देश का नाम रोशन करें।”

गंभीर ने यह भी जोड़ा कि, “अगर आप उस मकसद के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो बाकी सब चीजें गौण हैं। मैं फैमिली के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन जब आपकी प्राथमिकता देश होती है, तो बाकी सब चीजें खुद-ब-खुद पीछे हो जाती हैं।”

विराट कोहली ने क्या कहा था?
विराट कोहली ने भी इस मुद्दे पर अप्रत्यक्ष तौर पर नाराज़गी जताई।
RCB स्पोर्ट्स समिट में उन्होंने कहा, “किसी तनावपूर्ण दिन के बाद परिवार के पास लौटना आपको जमीन से जोड़े रखता है। लोगों को शायद यह समझ नहीं है कि यह कितना ज़रूरी होता है।”

“यह निराशाजनक है कि जिनका कोई लेना-देना नहीं, उन्हें इन नीतियों में घसीटा जाता है।”

नई पॉलिसी की मुख्य बातें:

  • परिवार केवल 45 दिन या उससे लंबी विदेशी टूरों में साथ रह सकते हैं।
  • खिलाड़ी टीम होटल में परिवार के साथ नहीं आ-जा सकते।
  • खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट खेलना अनिवार्य है।
  • टीम के साथ निजी स्टाफ का रहना प्रतिबंधित।

गंभीर ने साफ किया कि उनका मकसद सिर्फ देश के लिए खेलने की प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देना है, ना कि परिवार को दूर करना। लेकिन विराट और रोहित जैसे सीनियर खिलाड़ी इसे भावनात्मक संतुलन के खिलाफ मानते हैं। अब देखना होगा कि BCCI आगे इस नीति में कोई नरमी लाता है या नहीं।

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