नई दिल्ली : सिरदर्द एक आम समस्या है, जिससे लगभग हर व्यक्ति जीवन में कभी न कभी प्रभावित होता है। लेकिन कई बार लोग सामान्य सिरदर्द और माइग्रेन के बीच अंतर नहीं समझ पाते, जिसके कारण सही इलाज में देरी हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों के लक्षण, कारण और उपचार अलग-अलग होते हैं, इसलिए इन्हें पहचानना बेहद जरूरी है।
NIIMS Medical College and Hospital के चिकित्सा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सुमोल रत्ना के अनुसार, सामान्य सिरदर्द अक्सर थकान, तनाव, नींद की कमी, लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर देखने और खाली पेट रहने के कारण होता है। इसमें पूरे सिर में भारीपन या दबाव महसूस होता है और यह कुछ घंटों में आराम या हल्की दवा से ठीक हो जाता है।
माइग्रेन का दर्द होता है ज्यादा गंभीर
विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से काफी अलग और अधिक गंभीर होता है। माइग्रेन में दर्द आमतौर पर सिर के एक तरफ होता है और धड़कन जैसा महसूस होता है। यह दर्द इतना तेज हो सकता है कि व्यक्ति के लिए रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में यह दर्द कुछ घंटों से लेकर दो-तीन दिन तक बना रह सकता है।
माइग्रेन के साथ अक्सर उल्टी, चक्कर, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। कुछ लोगों को माइग्रेन शुरू होने से पहले आंखों के सामने चमक, धुंधलापन या टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं दिखाई देती हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में “ऑरा” कहा जाता है।
कारण और ट्रिगर भी होते हैं अलग
डॉक्टरों का कहना है कि माइग्रेन नसों और दिमाग से जुड़ी समस्या है, जिसमें आनुवांशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, तनाव, तेज धूप, तेज खुशबू, भूखे रहना, नींद की कमी, कैफीन, चॉकलेट और कुछ खाद्य पदार्थ माइग्रेन के ट्रिगर बन सकते हैं।
वहीं सामान्य सिरदर्द आमतौर पर अस्थायी होता है और इसका कारण थकान या तनाव होता है, जबकि माइग्रेन बार-बार हो सकता है और लंबे समय तक परेशान कर सकता है।
इलाज और बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी
सामान्य सिरदर्द आराम, पर्याप्त पानी, नींद और हल्की दवा से ठीक हो जाता है। लेकिन माइग्रेन के लिए विशेष दवाओं और लंबे समय तक उपचार की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर सिरदर्द बार-बार हो, बहुत तेज हो, सिर के एक तरफ हो या उल्टी और चक्कर जैसे लक्षण साथ हों, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
जीवनशैली में बदलाव से मिल सकता है लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि माइग्रेन से बचाव के लिए नियमित दिनचर्या अपनाना, पर्याप्त नींद लेना, समय पर भोजन करना, तनाव कम करना और स्क्रीन टाइम सीमित रखना जरूरी है। साथ ही माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारणों की पहचान कर उनसे बचना भी प्रभावी उपाय है।
डॉक्टरों का मानना है कि हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता, लेकिन बार-बार और तेज सिरदर्द को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सही जानकारी और समय पर उपचार से माइग्रेन को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें
