हरियाणा के नेताओं के अनोखे खान-पान के शौक

— गुस्ताखी माफ हरियाणा | पवन कुमार बंसल

“बंसीलाल को खिचड़ी पसंद थी, भजनलाल को जलेबी, देवीलाल को चिकन और मनोहरलाल को हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध गुच्छी सब्ज़ी। गुच्छी शरीर को ऊर्जा देती है और चेहरे पर निखार लाती है।”

हरियाणा की राजनीति जितनी दिलचस्प रही है, उतने ही रोचक रहे हैं यहां के नेताओं के खान-पान के शौक। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल को जहां खिचड़ी बेहद पसंद थी, वहीं देवीलाल नाश्ते में पूरा चिकन खाने के लिए जाने जाते थे। भजनलाल को आदमपुर के देशी घी से बनी जलेबी दूध में डालकर खाना बेहद प्रिय था, जबकि मनोहर लाल ‘गुच्ची’ की सब्जी के शौकीन माने जाते हैं।

कहा जाता है कि गुच्ची (एक विशेष प्रकार की मशरूम) की सब्जी से शरीर में ऊर्जा आती है और चेहरे पर निखार भी बढ़ता है। यह सब्जी काफी महंगी होती है, जिसकी कीमत 30-40 हजार रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है।

बंसीलाल जब रोहतक आते थे तो उनके लिए खास तौर पर शुगर-फ्री बिस्कुट मंगवाए जाते थे। उन्हें रसगुल्ले भी बेहद पसंद थे। एक बार जींद दौरे के दौरान परोसी गई खिचड़ी की उन्होंने खूब सराहना की थी, जिस पर बताया गया कि यह खिचड़ी सफीदों के विधायक धज्जा राम के घर से आई थी।

भजनलाल से जुड़ा एक पुराना किस्सा भी मशहूर है। जब वे कांग्रेस में शामिल हुए थे और राजीव गांधी अंबाला दौरे पर आए, तो भजनलाल ने उन्हें दूध-जलेबी परोसी। इस पर राजीव गांधी ने मुस्कुराते हुए कहा, “लगता है आपके चेहरे की लाली का राज यही जलेबी है।” इस पर भजनलाल ने हाजिरजवाबी दिखाते हुए जवाब दिया, “जनाब, लाली का जलेबी से कोई खास संबंध नहीं, जब तक आपकी मेहरबानी है, लाली बनी रहेगी।”

मनोहर लाल अपने मेहमानों की मेजबानी के लिए भी जाने जाते हैं। वे हिमाचल से मंगवाई गई गुच्ची की सब्जी खास मेहमानों को परोसते हैं। साथ ही, वे खुद खिचड़ी और चाय बनाना भी जानते हैं। उनकी डिजाइनर जैकेट भी काफी चर्चा में रहती है।

वहीं, ओमप्रकाश चौटाला को लस्सी और सादा भोजन पसंद है, जबकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ब्लैक टी के शौकीन हैं। पंडित भगवत दयाल शर्मा को खीर बेहद प्रिय थी और चौधरी नेकीराम प्याज खाने के अपने अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते थे।

नेताओं के शौक सिर्फ खाने तक सीमित नहीं हैं। बंसीलाल पढ़ने के शौकीन थे, देवीलाल उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ पढ़ते थे, और ओमप्रकाश चौटाला उर्दू में आए पत्र खुद पढ़ लेते थे। मनोहर लाल आधुनिक तकनीक और लैपटॉप संस्कृति को अपनाने में विश्वास रखते हैं।

यह लेख ‘हरियाणा की राजनीति, संस्कृति और प्रशासन’ पर आधारित मेरी आगामी पुस्तक “हरियाणवी लालों के सबरंगे किस्से” से साभार प्रस्तुत है।

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