लखीसराय(सरफराज आलम)कला, संस्कृति और सिनेमा को समर्पित संस्थान सिनेयात्रा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा : रजतपट की विरासत” के तीसरे और अंतिम दिन का केंद्र मैथिली सिनेमा रहा। कार्यक्रम में मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर, प्रारंभिक फिल्मों और उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर विशेष चर्चा की गई।इस अवसर पर पहली मैथिली फ़िल्म की नींव रखने वाली ममता गाबय गीत के गीत-संगीत की विशेष प्रस्तुति कला संस्कृति पदाधिकारी सह गायक कलाकार मृणाल रंजन द्वारा दी गई।
उनकी भावपूर्ण स्वर प्रस्तुति ने सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया और मिथिला की लोकधुनों की मिठास वातावरण में घुल गई।कार्यक्रम में पहली रिलीज़ मैथिली फ़िल्म कन्यादान का प्रदर्शन भी किया गया। सिनेयात्रा के सचिव एवं फ़िल्मकार रविराज पटेल ने जानकारी दी कि “ममता गाबय गीत” का निर्माण कार्य वर्ष 1962 में आरंभ हुआ, किंतु विभिन्न कारणों से इसके प्रदर्शन में लगभग 20 वर्ष लग गए और अंततः यह 1982 में रिलीज़ हो सकी। वहीं “कन्यादान” 1971 में बनकर दर्शकों के समक्ष आ गई। इस प्रकार मैथिली सिनेमा के इतिहास में दोनों फ़िल्में अलग-अलग कारणों से ‘प्रथम’ मानी जाती हैं—एक निर्माण की दृष्टि से और दूसरी रिलीज़ के आधार पर।
“ममता गाबय गीत” एक ग्रामीण मिथिला परिवार की मार्मिक कथा है, जिसमें माँ के त्याग, बेटी के संस्कार, पारिवारिक प्रतिष्ठा और सामाजिक मर्यादाओं को प्रभावी ढंग से चित्रित किया गया है। उस दौर में जब क्षेत्रीय सिनेमा अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, तब इस फ़िल्म ने मैथिली भाषा को बड़े परदे पर प्रतिष्ठा दिलाने का साहसिक प्रयास किया।वहीं “कन्यादान” दहेज प्रथा, सामाजिक रूढ़ियों और बेटी के विवाह जैसे संवेदनशील विषयों पर आधारित है। इसमें एक पिता की चिंता, समाज की अपेक्षाएँ और बेटी की भावनाओं को गहन संवेदनशीलता से उकेरा गया है। विवाह संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को केंद्र में रखकर इस फ़िल्म ने मैथिली सिनेमा को नई ऊर्जा प्रदान की।“ममता गाबय गीत” का निर्देशन सी परमानंद ने किया था। फ़िल्म में प्यारे मोहन सहाय और अजरा मुख्य भूमिकाओं में थे।
गीतों को रवीन्द्रनाथ ठाकुर के शब्दों पर आधारित बताया गया, जिनमें स्वर दिया गीता दत्त, सुमन कल्याणपुर और महेंद्र कपूर ने। वहीं “कन्यादान” साहित्यकार हरिमोहन झा की रचना पर आधारित और फणी मजूमदार द्वारा निर्देशित फ़िल्म है, जिसने सामाजिक संवेदनाओं को प्रभावी अभिव्यक्ति दी।कार्यक्रम के अंत में समापन सह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर ज़िलाधिकारी मिथिलेश मिश्र एवं मृणाल रंजन को सिनेयात्रा की ओर से स्मृति-चिह्न और अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया। मौके पर कई गणमान्य नागरिकों के साथ बालिका विद्यापीठ, वेद विद्यालय और बालिका फ़ुटबॉल टीम की खिलाड़ी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
