- रिपोर्ट: मनोज यादव
एटा। जनपद एटा की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शिकोहाबाद रोड स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में निर्धारित समय प्रातः 9:30 बजे तक भी स्कूल नहीं खुल सका। हैरानी की बात यह रही कि सुबह 9:56 बजे तक भी विद्यालय का गेट बंद रहा, जबकि दर्जनों बच्चे समय पर अपने कंधों पर बस्ते टांगे बाहर खड़े इंतजार करते रहे।
विद्यालय परिसर में ही एबीएसए कार्यालय स्थित होने के बावजूद न तो कोई शिक्षक मौजूद था और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी। नियमों का पालन करने वाले बच्चे समय से पहुंच गए, लेकिन जिन पर शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वे पूरी तरह नदारद नजर आए। यह दृश्य न केवल एक विद्यालय की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की संवेदनहीनता की तस्वीर पेश करता है।
शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में यदि हालात इतने खराब हैं, तो ग्रामीण इलाकों की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। समयपालन, अनुशासन और जवाबदेही जैसे बुनियादी मूल्य यदि शिक्षा के मंदिर में ही नजरअंदाज किए जा रहे हैं, तो बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव कैसे रखी जा सकती है।
यह सवाल बच्चों से नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से है कि शिक्षक और अधिकारी अपने कर्तव्यों से समय पर क्यों अनुपस्थित रहते हैं। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नौनिहालों के भविष्य के साथ किया गया अन्याय है। अब जरूरत है कि इस तरह की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई हो और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि शिक्षा का मंदिर ताले में कैद न रहे और बच्चों के सपने बंद दरवाजों के पीछे दम न तोड़ें।
