‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ बलिदान और सांस्कृतिक चेतना की स्मृति का प्रतीक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 से 12 जनवरी तक गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह सोमनाथ मंदिर में आयोजित होने वाले ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में भाग लेंगे और राजकोट में ‘वाइब्रेंट गुजरात’ क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे और साबरमती नदी तट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री का विस्तृत कार्यक्रम

तय कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 जनवरी को सोमनाथ पहुंचेंगे। रात करीब आठ बजे वह सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र के जाप में शामिल होंगे और इसके बाद भव्य ड्रोन शो देखेंगे। प्रधानमंत्री रात्रि विश्राम सोमनाथ में ही करेंगे।

11 जनवरी को सुबह लगभग 9:45 बजे प्रधानमंत्री ‘शौर्य यात्रा’ में भाग लेंगे। यह यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की जा रही है। शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला जाएगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक होगा।

इसके बाद सुबह 10:15 बजे प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। सुबह 11:00 बजे वह सोमनाथ में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। दोपहर 2:00 बजे प्रधानमंत्री राजकोट में ‘रीजनल वाइब्रेंट समिट’ का उद्घाटन करेंगे। शाम 5:15 बजे अहमदाबाद मेट्रो फेज-2 का उद्घाटन महात्मा मंदिर मेट्रो स्टेशन पर किया जाएगा।

प्रधानमंत्री रात्रि विश्राम गांधीनगर स्थित राजभवन में करेंगे। 12 जनवरी को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ द्विपक्षीय बैठकें होंगी। इस दौरान भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी, जो हाल ही में 25 वर्ष पूर्ण कर चुकी है, के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार, बातचीत में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये की सबमरीन डील पर भी विचार संभव है।

क्या है ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’

‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भारत के उन वीर नागरिकों की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और जिनके त्याग ने भावी पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को निरंतर प्रभावित किया है। यह कार्यक्रम वर्ष 1026 में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए हमले के 1,000 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम से जुड़े आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बीते कई शताब्दियों में सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने के अनेक प्रयासों के बावजूद आज यह मंदिर आस्था, धैर्य और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रतीक बनकर खड़ा है। मंदिर के जीर्णोद्धार की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 1951 रहा, जब मूल स्वरूप में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के द्वार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। आज़ादी के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प सरदार वल्लभभाई पटेल ने लिया था।

वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिससे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का महत्व और भी बढ़ गया है। यह पर्व न केवल इतिहास की स्मृति है, बल्कि सांस्कृतिक आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत उत्सव भी है।

 

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