“नाबालिकों के साथ पॉर्न वीडियो बनाकर विदेशी साइट्स को बेचने के मामले में सिचाई विभाग के जेई और उसकी पत्नी को फांसी की सजा सुनाकर पोक्सो कोर्ट ने पेश की नजीर”

बांदा, उत्तर प्रदेश में छोटे बच्चों के साथ सेक्स और कुकर्म के वीडियो बनाकर विदेशी साइट्स को बेचने के सनसनीखेज मामले में बांदा की विशेष पोक्सो एक्ट अदालत ने अपने फैसले में नजीर पेश की है। अदालत ने इस मामले में सरकारी इंजीनियर और उसकी पत्नी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है और लिखित आदेश दिया है कि जब तक इनकी मृत्यु न हो जाए तब तक इन्हें फांसी पर लटकाया जाए। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो दिल्ली की ओर से 2020 में जांच कर इन दोनों पर दिल्ली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। आज बांदा कोर्ट में फैसले के दौरान सीबीआई की टीम भी मौजूद रही। इन आरोपियों को सजा दिलाने में पोक्सो कोर्ट के शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने विशेष योगदान दिया है।

मामला बांदा जनपद का है, जहां बांदा-चित्रकूट का रहने वाला सिंचाई विभाग का जेई रामभुवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को छोटे बच्चों के साथ सेक्स और कुकर्म के वीडियो बनाकर उन्हें विदेशी साइट्स को बेचने का दोषी पाया गया है। इस पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की गई थी। सीबीआई की जांच में करीब दो लाख से ज्यादा वीडियो पाए गए थे। बताया जा रहा है कि इंटरपोल द्वारा सीबीआई को जानकारी मिली थी कि छोटे-छोटे बच्चों की पॉर्न वीडियो बनाकर सोशल साइट्स पर डाली जा रही हैं। इस प्रकरण में कुल 47 देशों में यह वीडियो पाए गए थे। आरोपी पति रामभुवन सिंचाई विभाग का जेई था, जबकि पत्नी दुर्गावती हाउस वाइफ थी। दोनों को कोर्ट ने 18 फरवरी को ही दोषी ठहरा दिया था। चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के मामले में सीबीआई ने रामभुवन को 18 नवंबर 2020 में गिरफ्तार किया था, वहीं उसकी पत्नी दुर्गावती को गवाहों पर समझौते के लिए दबाव डालने का दोषी पाया गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि चित्रकूट में पोस्टिंग के दौरान रामभुवन ने अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ मिलकर लगभग 33 से 34 छोटे बच्चों, जिनकी उम्र 3 से 18 वर्ष तक थी, को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाया और उनके साथ अश्लील वीडियो बनाए। जानकारी के मुताबिक रामभुवन की पत्नी बच्चों के साथ संबंध बनाती थी, जबकि रामभुवन बच्चों के साथ कुकर्म करता था। दोनों के लैपटॉप से बच्चों के अश्लील वीडियो बरामद हुए। शिकायत मिलने पर दोनों के खिलाफ सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को केस दर्ज किया था। आरोप था कि दोनों पति-पत्नी बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए विदेशी पॉर्नोग्राफी साइट्स को बेचते थे। जांच में पुख्ता सबूत मिलने पर सीबीआई ने दोनों को 17 नवंबर 2020 को गिरफ्तार कर लिया था।

जनपद न्यायालय के पोक्सो कोर्ट के शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने बताया कि अक्टूबर 2020 में इंटरपोल द्वारा सीबीआई को सूचना दी गई थी कि एक व्यक्ति छोटे बच्चों के पॉर्न वीडियो इंटरनेट पर अपलोड कर रहा है। सूचना देने वाले ने सीबीआई को एक पेन ड्राइव भी दी थी, जिसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो मौजूद थे। इस आधार पर सीबीआई ने दिल्ली में केस दर्ज किया था, क्योंकि बच्चे बांदा और आसपास के क्षेत्र के थे। आरोपी सिंचाई विभाग में जेई था। सीबीआई ने आरोपी जेई और उसकी पत्नी दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और कोर्ट में 74 गवाह पेश किए थे।

लंबी सुनवाई के बाद पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश ने दोनों को फांसी की सजा सुनाते हुए आदेश दिया कि जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए, तब तक उन्हें फांसी पर लटकाया जाए। इस फैसले को अदालत द्वारा एक सख्त और ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।

 

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