नई दिल्ली। महाभारत की प्रमुख पात्र द्रौपदी को भारतीय इतिहास की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में गिना जाता है। उनका नाम पंचकन्याओं—अहिल्या, कुंती, तारा, मंदोदरी और द्रौपदी—में भी शामिल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि द्रौपदी का एक पूर्वजन्म भी था, जिसमें उन्होंने भगवान शिव से विशेष वरदान प्राप्त किया था? आइए जानते हैं उनके जन्म और पूर्वजन्म से जुड़ी यह अद्भुत पौराणिक कथा।
कैसे हुआ द्रौपदी का जन्म?
महाभारत के अनुसार, राजा द्रुपद ने एक विशेष यज्ञ करवाया था। इसी यज्ञ से एक कन्या और एक पुत्र प्रकट हुए—कन्या द्रौपदी और पुत्र धृष्टद्युम्न। चूंकि वह यज्ञ से उत्पन्न हुईं, इसलिए उन्हें ‘याज्ञनी’ कहा गया। वहीं, पिता पांचाल नरेश होने के कारण वे ‘पांचाली’ भी कहलाईं।
पूर्वजन्म में थीं ब्राह्मणी कन्या
पौराणिक मान्यता के अनुसार, द्रौपदी का पूर्वजन्म एक ब्राह्मण कन्या ‘नलयनी’ के रूप में हुआ था, जो राजा नल और रानी दमयंती की पुत्री थीं। नलयनी भगवान शिव की परम भक्त थीं और उन्होंने कठोर तप से शिवजी को प्रसन्न किया।
शिव से मांगा विशेष वरदान
जब शिव प्रकट हुए, तो नलयनी ने उनसे वरदान मांगा कि उनका पति ऐसा हो जो सभी गुणों से युक्त हो—धर्म, बल, सौंदर्य, धैर्य और ज्ञान में सर्वोत्तम। इस पर शिव ने कहा कि यह एक व्यक्ति में संभव नहीं, लेकिन अगले जन्म में तुम्हें ऐसे पाँच पतियों का साथ मिलेगा जो इन सभी गुणों से भरपूर होंगे।
क्यों बनीं द्रौपदी पांच पतियों की पत्नी?
द्रौपदी का विवाह अर्जुन द्वारा स्वयंवर में विजयी होने पर हुआ, लेकिन कुंती के कथन—“जो भी लाए हो, पांचों में बांट लो”—के चलते पांचों पांडवों ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को उनके पूर्वजन्म की कथा बताई और कहा कि यह सब भगवान शिव के वरदान का ही परिणाम है।
डिस्क्लेमर:
यह कथा धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता के लिए कोई दावा नहीं किया जा सकता।
