- रिपोर्ट: प्रेम सिन्हा
पटना सिटी, 07 जनवरी।कालजयी शायर खान बहादुर सैय्यद मोहम्मद शाद अज़ीमाबादी की 99वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पटना सिटी में स्मृति समारोह का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, राजनेताओं एवं संस्कृतिकर्मियों ने शाद को याद करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया।
बुधवार की सुबह शाद अज़ीमाबादी पथ, लंगर गली, हाजी गंज स्थित उनकी मजार पर चादरपोशी और गुलपोशी कर फतेहा पढ़ी गई। सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था नवशक्ति निकेतन के तत्वावधान में आयोजित स्मृति सभा में कवियों और शायरों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से शाद को श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि रमेश कंवल एवं वरिष्ठ शायर खुर्शीद अकबर को ‘शाद अज़ीमाबादी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं कवयित्री पूनम सिन्हा ‘प्रेयसी’ एवं शायरा जीनत शेख को ‘साहित्य और समाज सेवा सम्मान’ प्रदान किया गया। सभी सम्मान शॉल, प्रतीक चिन्ह एवं प्रमाण पत्र देकर प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के महासचिव कमलनयन श्रीवास्तव ने किया।
मुख्य अतिथि विधायक रत्नेश कुशवाहा ने शाद को कालजयी शायर बताते हुए कहा कि अजीमाबाद साहित्यकारों और क्रांतिकारियों की कर्मभूमि रही है। कमलनयन श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि “शाद की नज़्मों में मुल्क का दिल धड़कता है।”
वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने शाद की दुर्लभ रचनाओं को हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में प्रकाशित कराने की मांग सरकार से की। शाद के प्रपौत्र सैय्यद शकील अहमद ने शाद की मजार को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर उसे जीवंत स्मारक का रूप देने की मांग रखी। महापौर सीता साहू ने शाद की स्मृति-रक्षा के लिए हर संभव पहल का भरोसा दिलाया।
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने शाद को राष्ट्रीय एकता का मुकम्मल शायर बताते हुए उनके स्मृति संरक्षण पर विशेष बल दिया। वक्ताओं ने शाद की मजार को राष्ट्रीय स्मारक एवं राष्ट्रीय संग्रहालय घोषित करने, शाद अज़ीमाबादी पथ का शिलापट्ट लगाने, शाद अज़ीमाबादी पार्क के निर्माण तथा स्मारक डाक टिकट जारी करने की मांग दोहराई।
समारोह में रामा शंकर प्रसाद, वरिष्ठ पत्रकार अशरफ फरीद, रेहान गनी, मधुरेश नारायण, प्रेम किरण, डॉ. विनोद अवस्थी, फिरोज हसन, फरीदा अंजुम, अनिल रश्मि, जकीर बक्स, मोहम्मद अमीन, मोहम्मद फिरोज, मनोज कुमार मिश्र, परितोष कुमार, शुभचन्द्र सिन्हा, कामरान गनी, सुनील कुमार, आलोक चोपड़ा, अनंत अरोड़ा, लल्लू शर्मा एवं राजेश राज सहित अनेक गणमान्य लोगों ने शाद के जीवन और साहित्य पर विचार रखे।
समारोह का समापन डॉ. कलीम आज़िज की पंक्तियों—
“आज वर्षी है तुम्हारी आओ शाद,
हम रयाकारों से भी मिल जाओ शाद…”
के पाठ के साथ हुआ। धन्यवाद ज्ञापन प्रेम किरण ने किया।
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