रामपुर। शुक्रवार की रात रामलीला मैदान श्रद्धा, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम बन गया। मंच पर विभीषण राज्याभिषेक से लेकर प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या आगमन तथा श्रीराम राज्याभिषेक तक की झलकियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। चारों ओर गूंजते जय श्रीराम और सीता माता की जय के नारों ने माहौल को और पावन बना दिया।
लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम द्वारा विभीषण को राजगद्दी सौंपने का दृश्य इतना जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया कि मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कलाकारों का भावपूर्ण अभिनय देखकर हर कोई धर्म की विजय का उत्सव मनाता दिखाई दिया।
इसके बाद पुष्पक विमान से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का अयोध्या आगमन दिखाया गया। मंच पर सजाए गए पुष्पक विमान की भव्यता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फूलों की वर्षा और मंगलगान के बीच राम दरबार के स्वागत का दृश्य इतना यथार्थ लगा कि दर्शक हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
रामलीला मंचन का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब श्रीराम का राज्याभिषेक संपन्न हुआ। शंखनाद और वेद मंत्रों की गूंज के बीच श्रीराम, राजसिंहासन पर विराजमान हुए और उनके चारों ओर राम दरबार सजा। भगवान श्रीराम, माता सीता, भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के संग यह दिव्य दृश्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें आंसुओं से भर उठीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरी अयोध्या ही रामपुर के रामलीला मैदान में उतर आई हो।
रामलीला समिति द्वारा किए गए मंचन में कलाकारों का अभिनय और वेशभूषा दोनों ही अद्वितीय रहे।
भगवान श्रीराम की भूमिका निभाने वाले कलाकार ने मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्श और शालीनता को जीवंत कर दिया। माता सीता की भूमिका इतनी भावपूर्ण रही कि दर्शकों ने उन्हें सचमुच जगत जननी का स्वरूप मानकर श्रद्धा अर्पित की। विभीषण और भरत के कलाकारों ने भी अपनी गंभीरता और समर्पण से दर्शकों का मन मोह लिया।
श्रीराम राज्याभिषेक केवल एक राजतिलक का मंचन नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और आदर्श शासन की स्थापना का प्रतीक है। “रामराज्य” का अर्थ है जहां प्रजा भय और दुख से मुक्त हो। जहां हर व्यक्ति समान और सुखी हो। जहां शासन में नीति, करुणा और सत्य की प्रधानता हो।
इतिहास गवाह है कि रामराज्य में न कोई भूखा था, न कोई दुखी। हर घर में समृद्धि, शांति और आनंद था। यही कारण है कि आज भी रामराज्य आदर्श शासन की मिसाल माना जाता है।
रामलीला में आए श्रद्धालु इस अद्भुत मंचन को देखकर भावुक हो उठे। रामलीला मंचन के मीडिया प्रभारी गौरव जैन ने कहा कि ऐसा लगा मानो सचमुच त्रेतायुग लौट आया हो। जब श्रीराम का राजतिलक हुआ, तो आंखें नम हो गईं। अगर हर शासक श्रीराम के आदर्शों को अपनाए, तो पूरा देश रामराज्य बन जाएगा।
सच कहा जाए तो इस बार रामपुर की रामलीला सिर्फ मंचन नहीं रही, बल्कि श्रद्धा, कला और संस्कृति का ऐसा जीवंत अनुभव बनी जिसे लोग उम्रभर याद रखेंगे।
