गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
उत्तर प्रदेश और हरियाणा की कार्यशैली में फर्क एक बार फिर सामने आ गया है। नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनाक्रोश को गंभीरता से लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को पद से हटा दिया। वहीं गुरुग्राम में हालिया बाढ़ के दौरान 25 वर्षीय ग्राफिक डिज़ाइनर की करंट लगने से हुई मौत के मामले में अब तक किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
गुरुग्राम में भारी बारिश के दौरान जलभराव में डूबी एक लाइव वायर के संपर्क में आने से युवक की मौके पर ही मौत हो गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिम्मेदारी तय करने के लिए समिति गठित करने के आदेश तो दिए, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बावजूद कार्रवाई शून्य है। सवाल यह है कि क्या समिति बनाना ही जवाबदेही तय करने का अंतिम विकल्प बन गया है?
इसके उलट नोएडा की घटना में प्रशासनिक संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई दी। नोएडा में एक निर्माणाधीन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई। घटनाक्रम के अनुसार पुलिस को रात 12:06 बजे सूचना दी गई, युवराज 2:30 बजे तक डूब चुका था और बचाव दल लगभग सुबह 4 बजे पहुंचा। इस देरी और लापरवाही को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री योगी ने सीधे तौर पर सीईओ को हटाने का फैसला किया।
हैरानी की बात यह है कि इस हादसे से करीब साढ़े चार महीने पहले ही स्थानीय निवासियों ने गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा को पत्र लिखकर बुनियादी नागरिक सुविधाओं की कमी की ओर आगाह किया था। पत्र में खराब स्ट्रीट लाइटिंग, टूटी सड़कें, जलभराव और खुले नालों की समस्या का स्पष्ट उल्लेख था। इसके अलावा 2023 में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने भी सेक्टर-150 नोएडा में जमा पानी की निकासी की जरूरत को चिन्हित किया था, जिसकी रिपोर्ट द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई।
द टाइम्स ऑफ इंडिया ने पीड़ित पिता का दर्दनाक बयान छापा—“मेरे बेटे को हादसे ने नहीं, संस्थागत विफलता ने मारा।” यह बयान सिर्फ नोएडा नहीं, गुरुग्राम की हकीकत पर भी सटीक बैठता है।
गुरुग्राम के हालात पर द टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह भी रिपोर्ट किया कि GRAP-4 लागू होने के बावजूद शहर में खुले में C&D वेस्ट पड़ा है, सड़कों की खुदाई जारी है और जहरीली हवा से शहर घुट रहा है। नियमों का प्रवर्तन कहीं नजर नहीं आता।
टेलपीस
मुख्यमंत्री साहब, गुरुग्राम के नागरिकों को मंत्री राव नरबीर सिंह और विधायक मुकेश शर्मा की दया पर मत छोड़िए। न ही उन्हें आईएएस अधिकारियों की मनमर्जी के भरोसे छोड़ा जाए। गुरुग्राम में डेढ़ दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारी तैनात हैं, फिर भी सिविक सुविधाओं की हालत बदतर है। आपके सीपीएस राजेश खुल्लर यहां एक सप्ताह सफाई की निगरानी कर चुके हैं और सेवानिवृत्त सीपीएस डी.एस. ढेसी को स्थानीय निकाय सलाहकार बनाया गया है। बावजूद इसके, जमीनी बदलाव नजर नहीं आ रहा। सवाल सीधा है—जवाबदेही कब तय होगी?

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