भगवान बनकर उतरे मुख्यमंत्री! गरीबों के नाम पर मंच, घोषणाओं की बौछार, लेकिन सवाल अब भी बाकी

कोटपूतली-बहरोड़ (राजस्थान), 6 जुलाई 2025 : पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीब संबल योजना के तहत आयोजित एक शिविर का दृश्य उस समय भक्तिमय बन गया जब राजस्थान के मुख्यमंत्री ने ‘धरती पर भगवान’ जैसे स्वागत के बीच मंच पर कदम रखा। नारायणपुर में आयोजित इस शिविर में मुख्यमंत्री के स्वागत में जयकारों की गूंज सुनाई दी – जैसे कोई देवता स्वयं लोगों के दुख हरने आ गया हो।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नारायणपुर को नगरपालिका का दर्जा देने की घोषणा की और कोटपूतली-बहरोड़ जिले के लिए ₹4.5 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात दी। उनकी घोषणा से समर्थकों और उपस्थित लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई।

मुख्यमंत्री ने मंच से कहा कि राज्य सरकार गरीबों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से “धनवान” बनाने का प्रयास कर रही है। योजनाएं गरीबों के कल्याण, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं।

लेकिन कार्यक्रम में भावनाओं की इस ऊँचाई के बीच कुछ कड़वे सवाल भी उभर कर सामने आए –

क्या सरकारी योजनाओं के जरिए वास्तव में गरीबों को रोजगार मिल रहा है?
क्या अच्छी शिक्षा हासिल करने के बावजूद युवा आज “अंत्योदय योजना” के पात्र बनते जा रहे हैं?
क्या सरकार की योजनाएं वास्तव में गरीबी को मिटा रही हैं या सिर्फ वादों तक सीमित रह गई हैं?

कार्यक्रम में भारी संख्या में उमड़े लोग जयकारे लगाते रहे, लेकिन यह भी स्पष्ट था कि भक्ति और हकीकत के बीच की खाई अब भी उतनी ही गहरी है।

सरकार से अपेक्षा रखने वाली जनता अब भी अपने पूर्वजों को याद करके, पाठ-पुजा करके सुख-शांति और उन्नति की उम्मीद कर रही है। लेकिन ‘भगवान’ बनकर मंच पर आए मुख्यमंत्री के भाषणों में जनता के सवालों के समाधान कम, घोषणाओं की गूंज ज्यादा सुनाई दी।

अब देखना यह है कि यह घोषणाएं विकास की गंगा बनकर बहेंगी या राजनीतिक भावनाओं की लहरों में ही डूब जाएंगी।

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