गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
नई दिल्ली। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक बहस होती रही है। इसी कड़ी में यह सवाल एक बार फिर उठता है कि क्या देश के सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को राजनीतिक नेताओं से सार्वजनिक रूप से दूरी बनाए रखनी चाहिए। भले ही मुलाकातें औपचारिक या शिष्टाचारवश हों, लेकिन यदि कभी भेंट हो भी जाए तो उसकी तस्वीरें सार्वजनिक मंच पर साझा नहीं की जानी चाहिए—क्योंकि न्यायपालिका की निष्पक्षता केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखनी भी चाहिए।
इसी संदर्भ में माननीय श्री सूर्यकांत शर्मा, चीफ जस्टिस, को उनके जन्मदिन के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य प्राप्त हो। वे सदैव अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा, समर्पण और उत्कृष्टता के साथ करते रहें—यही देश की अपेक्षा और कामना है।
हरियाणा सरकार में मंत्री अरविंद शर्मा द्वारा भी इस अवसर पर शुभकामनाएं प्रेषित की गईं। हालांकि, संवैधानिक पदों की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए यह विचार महत्वपूर्ण है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच सार्वजनिक निकटता की तस्वीरें या संकेत संस्थागत संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। लोकतंत्र की मजबूती के लिए ‘दूरी की मर्यादा’ भी उतनी ही आवश्यक है जितनी आपसी सम्मान की भावना।
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