गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
दस साल पहले हरियाणा में हुए आरक्षण आंदोलन के दौरान पूरा प्रदेश जल रहा था और अफ़सर राजनीति में उलझे हुए थे।
हरियाणा बारूद के ढेर पर बैठा था और अफ़सर आपस में लड़ रहे थे।
हांसी में हालात कभी भी विस्फोटक हो सकते हैं—एसडीएम परीक्षित।
डीएसपी नरेंद्र कादियान मेरी बात सुन नहीं रहे हैं।
आंदोलनकारी खट्टर के खिलाफ गंदे नारे लगा रहे हैं।
वे कह रहे हैं—“खट्टर से डरो मत, वह चंद दिनों का मेहमान है।”
मैंने राकेश सर, अभिमन्यु सर और सभी संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
चीफ सेक्रेटरी हालात के बारे में साढ़े तीन बजे तक अपडेट मांग रहे थे।
डीएसपी का कहना था—“मैं तो डिप्टी कमिश्नर और एसपी को ही रिपोर्ट करता हूं।”
जब एसडीएम परीक्षित का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला।
नरेंद्र कादियान से गुस्ताखी माफ हरियाणा के तहत बातचीत हुई।
नरेंद्र कादियान ने बताया कि सारी रिपोर्ट हिसार के डिप्टी कमिश्नर तथा पुलिस अधीक्षक को दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सात दिनों से धरना शांतिपूर्वक चल रहा है।
एसडीएम परीक्षित ने तो मात्र दो दिन पहले ही चार्ज लिया है।
रामायण के पास धरनास्थल पर हिसार के डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर और तहसीलदार की ड्यूटी लगाई गई है।
कादियान ने बताया कि वहां दो डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस और पुलिस के पांच सौ जवान तैनात हैं।
कोई भी अवैध वाहन वहां नहीं आने दिया जा रहा है।
सभी की वीडियोग्राफी की जा रही है और वाहनों के नंबर नोट किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा—“मैं ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कर रहा हूं। यदि कोई कोताही होती तो मुझे अब तक यहां कैसे रखा जाता?”
एसडीएम साहिब ने मेरी शिकायत डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस श्री के. पी. सिंह से की है या नहीं, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
बाकी सुरक्षा के मद्देनज़र किए गए सभी प्रबंधों की पूरी जानकारी प्रेस को नहीं दी जा सकती।
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