प्रेमानंद महाराज का सत्संग: अशुभ प्रारब्ध को भोगना ही पड़ता है, नाम-जप से भी नहीं बदलती नियति का यह…
एकांतिक वार्तालाप के दौरान संत प्रेमानंद महाराज से एक महिला भक्त ने प्रश्न किया कि नियति का वह कौन-सा भाग है जिसे नाम-जप, साधना या किसी भी उपाय से बदला नहीं जा सकता और जिसे मनुष्य को हर हाल में भोगना ही पड़ता है। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए…
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