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Premanand Maharaj

प्रेमानंद महाराज का सत्संग: अशुभ प्रारब्ध को भोगना ही पड़ता है, नाम-जप से भी नहीं बदलती नियति का यह…

एकांतिक वार्तालाप के दौरान संत प्रेमानंद महाराज से एक महिला भक्त ने प्रश्न किया कि नियति का वह कौन-सा भाग है जिसे नाम-जप, साधना या किसी भी उपाय से बदला नहीं जा सकता और जिसे मनुष्य को हर हाल में भोगना ही पड़ता है। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए…
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Ekantik Vartalaap: प्रेमानंद महाराज बोले—सबसे बड़ा दुख मूर्खता और सबसे बड़ा सुख विवेक

Premanand Govind Sharan Ji Maharaj: एकांतिक वार्तालाप के दौरान संत प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज से एक श्रोता ने सवाल किया कि संसार का सबसे बड़ा सुख क्या है और सबसे बड़ा दुख क्या माना जाए। इस प्रश्न के उत्तर में महाराज ने गहन आध्यात्मिक और…
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