वक्त ने बदली है करवट इस तरह, जो भिखारिन थी वो दानी हो गई
बदायूं। चराग़-ए-सुख़न संस्था द्वारा आयोजित मासिक तरही मुशायरे में देर रात तक ग़ज़लों और शेर-ओ-शायरी का सिलसिला चलता रहा। कार्यक्रम की सदारत अल्हाज सालिम फ़रशोरी ने की, जिन्हें शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर…
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