“बुंदेली सुरों की पहचान गढ़ने को तैयार ‘बुंदेली बावरा’ – लोकगीत और लोकभाव की आवाज़ का नया मंच”
छतरपुर, दिसंबर 2025। बुंदेलखंड की मिट्टी में जहाँ परिश्रम की सोंधी महक बसती है, वहीं इसकी पहचान बने लोकगीतों की मधुर गूँज भी हर दिल में रची-बसी है। इसी लोक संगीत की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और क्षेत्र के लोक कलाकारों को पहचान दिलाने के…
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