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Charag-e-Sukhan

…ऐसा तो ज़मीं पर कोई बाज़ार नहीं है” — चराग़-ए-सुख़न के मासिक तरही मुशायरे में शायरों ने बांधा समां

बदायूं।चराग़-ए-सुख़न संस्था की ओर से आयोजित मासिक तरही मुशायरे में शायरी का शानदार रंग देखने को मिला। मुशायरे में शायरों ने अपनी उम्दा ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और देर रात तक अदबी महफिल जमी रही।मुशायरे का आग़ाज़ नात-ए-पाक से…
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