लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज जनपद गोरखपुर में परमहंस योगानंद जी की जन्मस्थली के पर्यटन विकास हेतु 27 करोड़ 68 लाख रुपये की परियोजना का शिलान्यास एवं भूमिपूजन किया। उन्होंने जन्मस्थली के विकास कार्यों के मानचित्र का अवलोकन किया तथा कार्यों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज गोरखपुर के विकास में एक महत्वपूर्ण कड़ी को बढ़ाने के लिए हम सब यहां आए हैं। इस महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में श्री योगानंद जी के जन्म स्थान के 132 वर्ष बाद पुनरुत्थान कार्य किया जा रहा है। 05 जनवरी, 1893 को एक बंगाली परिवार में श्री मुकुन्द लाल घोष का जन्म हुआ था। इनके पिता रेलवे के कर्मचारी थे। श्री मुकुन्द लाल घोष के बचपन के 08 वर्ष गोरखपुर में बीते थे। वे बाद में परमहंस योगानंद कहलाए। बचपन में उनकी माँ का निधन हो जाने के कारण उन्हें कलकत्ता वापस जाना पड़ा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आध्यात्मिक जिज्ञासु होने के कारण बालक मुकुन्द लाल घोष ने बाबा गोरक्षनाथ के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्ति की शुरुआत की। वह सत्संग, क्रियायोग के रूप में आगे बढ़कर ‘योगदा सोसाइटी एण्ड सेल्फ रियलाइजेशन’ द्वारा पूरी दुनिया में छा गए। श्री परमहंस योगानंद के इस स्थान के साथ की स्मृति को संजोने एवं गोरखपुर से उनको जोड़ने के लिए, उनके जन्म स्थल को विकसित करने का विचार बहुत दिनां से था। यह स्थान मुक्ति स्थल है। यह स्थान मुमुक्ष प्रदाता है। आज इस स्थान पर श्री परमहंस योगानंद जी का स्मरण हो रहा है, यह हम सबके लिए एक बड़ा अवसर है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की परम्परा ऋषियों, मुनियों, योगियों एवं संतों से जुड़ी है। इन ऋषियों एवं मुनियों ने भौतिक ज्ञान तथा चेतना के विस्तार के माध्यम से इस जगत के साथ ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के रहस्यों को उजागर किया। भारत की ऋषि परम्परा में ऐसे ऋषि, मुनि एवं योगी हुए हैं, जिन्होंने अपनी साधना व सिद्धि के माध्यम से तत्कालीन समाज को मार्गदर्शन दिया तथा मानव जीवन के उन रहस्यों से भी अवगत कराया, जो सामान्य स्थिति में एक आम मनुष्य के लिए कठिन होता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह भारत के अध्यात्म की पराकाष्ठा थी कि महाभारत में चक्षुहीन धृतराष्ट्र को युद्ध का वृत्तान्त संजय ने महर्षि वेदव्यास द्वारा दी गई दिव्यदृष्टि से देखकर सुनाया था। महाभारत के सम्पूर्ण युद्ध को तीन लोग, भगवान श्रीकृष्ण, महर्षि वेदव्यास एवं संजय ने देखा था। दूर रहकर महल के अन्दर पूरे युद्ध का विवरण सुनाया जा रहा था, यह हमारे ऋषियों, मुनियों की साधना तथा सिद्धि का ही परिणाम था। हमारे ऋषियों, मुनियों के अनेक वृत्तान्त सभी ने सुने हैं। आज हमारी धरोहर के रूप में वेद, पुराण, रामायण, महाभारत हैं। इन ग्रन्थों के माध्यम से हमारे ऋषियों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक चेतना एवं ब्रह्माण्ड के रहस्यों को प्रस्तुत किया। इसी परम्परा में गोरखपुर में महायोगी भगवान गोरक्षनाथ, बाबा योगीराज गम्भीरनाथ एवं गोरक्षपीठ के अन्य योगियों ने अपनी आध्यात्मिक साधना के माध्यम से पूरे देश के लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का कार्य किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बंगाल की परम्परा में भी इसी प्रकार के ऋषियों एवं योगियों के दर्शन होते थे। श्री रामकृष्ण परमहंस इस परम्परा के एक दिव्यज्योति थे। स्वामी प्रणवानंद जी इस परम्परा की एक प्रखर ज्योति थे। स्वामी परमहंस योगानंद जी ने अपना पूरा जीवन भारत की आध्यात्मिक परम्परा को वैश्विक पटल पर स्थापित करने में लगाया। गोरखपुर की धरती ने ऐसे संत को जन्म दिया, यह हमारे लिए गर्व की बात है। अपनी आत्मकथा में भी स्वामी परमहंस योगानंद जी ने गोरखपुर में अपने बचपन की स्मृतियों को लिखा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वामी योगानंद जी केवल 60 वर्ष इस धराधाम में रहे, किन्तु इतने ही काल में वे भारत की आध्यात्मिक धरोहर को लेकर वैश्विक क्षितिज पर छा गये। देश व दुनिया के अनेक क्षेत्रों में उनके अनेक अनुयायी हैं। उन सभी की इच्छा थी कि उनका स्मारक स्थल यहां बने। शासन के सहयोग से अब यहां भव्य योग मन्दिर बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने जिला प्रशासन से कहा कि अगले डेढ़ वर्ष के अन्दर यह मन्दिर बन जाए। इससे हम योगानंद जी की परम्परा को स्मरण कर उनको श्रद्धाजंलि अर्पित कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जो समाज अपनी प्राचीन परम्परा एवं पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित नहीं करता, उसके विकास के मार्ग बाधित हो जाते हैं। वह समाज अंधकार की ओर जाने लगता है। उसके आगे कोई मार्ग नहीं होता। परम्परा से भटका हुआ व्यक्ति एक कालकोठरी की तरफ जाता है। विरासत से भटका हुआ व्यक्ति अंधकार की ओर जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का अपनी विरासत के प्रति जो विजन है, यह उसका भी एक भाव है। यह उस भाव के प्रति एक समर्पण है। आज हम उस विरासत का पुनःस्मरण कर रहे हैं, जो विरासत 132 वर्ष पूर्व स्वामी योगानंद जी के रूप में इस स्थान पर दिव्यज्योति के रूप प्रज्ज्वलित हुई थी और बाद में वैश्विक पटल पर भी छा गयी। यह दिव्यज्योति 132 वर्ष बाद इस मुक्ति स्थल पर सबको प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि उस समय गोरखपुर बसावट में बहुत छोटा था। यह स्थान उस समय का एक मुख्य बाजार था। उस समय इसकी आबादी 05 से 07 हजार रही होगी। आज तो गोरखपुर का बहुत फैलाव हो गया है। आज गोरखपुर की आबादी 70 लाख व महानगर की आबादी लगभग 20 लाख है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोरखपुर में विकास के अनेक कार्य हुए हैं। सड़कें चौड़ी हो रही हैं। यहां घण्टाघर का पुनरुद्धार हो रहा है। लटकते बिजली के तारों को अण्डरग्राउण्ड किया जा रहा है। अच्छी स्ट्रीट लाइट लगी हुई हैं। गोरखपुर में सभी विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए नगर निगम के साथ सभी विधायकों ने भी अच्छे प्रयास किए हैं। विकास की इसी प्रक्रिया का परिणाम है कि मुक्तेश्वरनाथ मन्दिर, जटाशंकर एवं मोहद्दीपुर गुरुद्वारे के पुनरुद्धार का कार्य हो चुका है। काली मन्दिर के सौन्दर्यीकरण एवं पर्यटन विकास सम्बन्धी कार्य सम्पन्न हुए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विकास की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। गोरखपुरवासियों ने इस विकास प्रक्रिया में हमेशा सहयोग दिया है। आज गोरखपुर में एम्स, फर्टिलाइजर कारखाना, रामगढ़ताल भी है। शासन द्वारा आज गोरखपुर में विकास प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ सुरक्षा का बेहतर माहौल बनाया गया हैं। विकास सार्थक तभी है, जब सुरक्षा है। सुरक्षा के बिना समृद्धि बहुत दिन तक नहीं रह सकती। सुरक्षा के बिना विकास बाधित हो जाता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के पूर्व विकास इसलिए बाधित हो जाता था, क्योंकि तब सुरक्षा का कोई माहौल ही नहीं था। अपराधी, माफिया शासन की योजनाओं का लाभ हड़प लेते थे और व्यापारी, गरीब की जमीन पर जबरदस्ती कब्जा कर लेते थे। आज कोई भी किसी की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। यदि कोई ऐसा करता है, तो उसको लेने के देने पड़ जाएंगे। आज बहन, बेटी व व्यापारी सुरक्षित हैं। सी0सी0टी0वी0 कैमरों के माध्यम से सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के बेहतर माहौल का परिणाम है कि आज प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार आज प्रदेश के प्रमुख शहर वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, प्रयागराज, लखनऊ के साथ अन्य सभी शहरों एवं जनपदों के विकास के साथ विरासत का संरक्षण भी कर रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल के निर्माण केन्द्र का उद्घाटन किया गया है। सभी को पता है, आज से 02 दिन पूर्व पाकिस्तान ने जिस मिसाइल को निशाना बनाने की कोशिश की थी, वह ब्रह्मोस थी। इस मिसाइल का निर्माण अब लखनऊ में होगा। यह मिसाइल दुश्मनां एवं उनके आकाओं को भयाक्रान्त करने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि यह कार्य तभी होते हैं, जब सुरक्षा का बेहतर माहौल होता है। सुरक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति के मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हम सब तभी सुरक्षित हैं, जब हमारा राष्ट्र सुरक्षित है। हमारा देश तभी सुरक्षा एवं समृद्धि की ओर अग्रसर होगा, जब हम सभी की प्राथमिकता में देश सर्वप्रथम होगा। राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ हम सभी कार्य करें। कोई भी देश की आन, बान, शान के साथ गुस्ताखी करेगा, तो उसके छक्के छुड़ा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की लड़ाई हम सबकी लड़ाई होनी चाहिए। देश का सम्मान, हम सबका सम्मान होना चाहिए। इस भाव के साथ हम सब कार्य करेंगे, तभी देश की आध्यात्मिक विरासत, समृद्धि एवं सुरक्षा संरक्षित हो पाएगी।
कार्यक्रम को योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया के महासचिव स्वामी ई0 वरानन्द तथा सांसद श्री रवि किशन शुक्ल ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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