रिपोर्ट: ऋतु मोहन मीरापुर
मीरापुर।वन्य जीव सप्ताह के दूसरे दिन गंगा बैराज के गंगा डॉल्फिन पॉइंट से गंगा डॉल्फिन की गणना की शुरुआत की गई।
रामराज के गंगा बैराज पर वन्य जीव सप्ताह के दूसरे दिन गंगा डॉल्फिन की गणना की शुरुआत प्रभागीय निदेशक मुजफ्फरनगर कन्हैया पटेल ने हरी झंडी दिखाकर गणना दल को रवाना किया। गंगा डॉल्फिन गणना दल का नेतृत्व मोहम्मद शाहनवाज खान और वरिष्ठ संयोजक संजीव यादव कर रहे है। यह गणना बैराज से नरौरा तक लगभग 220 km तक जायेगी और 6 अक्टूबर को नरौरा पहुंचेगी। इस गणना के अंतिम आंकड़े मुख्य वन संरक्षक, मेरठ जोन एन के जानू द्वारा 7 अक्टूबर को घोषित किए जायेंगे। इस गंगा डॉल्फिन गंगा में उप प्रभागीय वनाधिकारी विमल किशोर भारद्वाज, क्षेत्रीय वन अधिकारी रविकांत चौधरी और वन निरीक्षक रमेश कुमार भी उपस्थित थे। बता दे कि राज्य वन विभाग के साथ मिलकर विश्व प्रकृति निधि भारत (WWF India) गंगा नदी में सूस की संख्या की गणना कर रहे हैं। यह अभियान 02 अक्तूबर 2023 को शुरू हुआ और 7 अक्तूबर 2023 तक चलेगा। गणना गंगा नदी में बिजनौर- मुजफ्फरनगर बैराज से नरौरा तक होगी। गंगा घाटी में जहां हम रहते हैं वह पांच अरब लोगों और 140 से अधिक जलीय प्रजातियों का घर है, जितना हम अपनी दैनिक जरुरतों हेतु इस नदी से जुड़ते हैं चाहे वह परिवहन हो, रहवास हो, जल हो या कुछ और हम इस नदी के जल के माध्यम से जीवन से जुड़ते हैं।
गांगेय डॉल्फिन विश्व में पाई जाने वाली स्वच्छ जलीय डॉल्फिन प्रजातियों में से एक प्रजाति है। डॉल्फिन एक स्तनपायी प्राणी है इस कारण यह नदी की सतह पर आकर सास लेती हैं। श्वास की ध्वनि के कारण ही इसको आमतौर पर सूँस या “सुसु” के नाम से जाना जाता है। गंगा रिवर डॉलफिन जो कि एक शर्मीली और बहुत दुर्लभ रहवासी है, वर्ष 2010 की घोषित राष्ट्रीय जलजंतु घोषित हुई और यह गंगा, ब्रम्हपुत्र तथा मेघना नदी व्यवस्थाओं में पाई जाती है। व गंगा रिवर डॉलफिन अपनी नदी पारस्थितिक व्यवस्था में सर्वोच्च परभक्षी जन्तु है। वे स्वस्थ मत्स्य और कड़े खोल वाले जलजीवों को अपने प्राथमिक भोजन के रूप में ग्रहण करके खाद्य श्रृंखला को नियंत्रित करते है। गंगा रिवर डॉलफिन एक संकेतक जन्तु है जो स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरणीय उपस्थिति के संकेतक के रूप में कार्य करता है ।
