सोनभद्र: स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर व्यापार संगठन का ज्ञापन, सीएमओ से की ठोस कार्रवाई की मांग

  • रिपोर्ट: शिवेंदु श्रीवास्तव

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन सोनभद्र का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी.के. राय से मिलकर जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता जताई।
बैठक में नोडल प्राइवेट हॉस्पिटल डॉ. कीर्ति आज़ाद, डिप्टी सीएमओ डॉ. सुमन जायसवाल, एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर आकाश तिवारी तथा मेडिकल कॉलेज के डॉ. अनुभव मिश्रा मौजूद रहे।
संगठन के जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि सोनभद्र नीति आयोग के आकांक्षी जिलों में शामिल है और सामाजिक-आर्थिक मानकों, विशेषकर स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी काफी पिछड़ा है। सरकार का उद्देश्य जिले को पिछड़ा बताना नहीं, बल्कि लक्षित प्रयासों के माध्यम से तेज, समावेशी और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जनपद चार राज्यों से जुड़ा होने के कारण मेडिकल कॉलेज की सुविधा का लाभ भविष्य में अन्य राज्यों के लोगों को भी मिलेगा, लेकिन इसके लिए गंभीर और निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि नगर की आबादी डेढ़ लाख से अधिक होने के बावजूद तत्काल चिकित्सा सुविधा का अभाव है। मेडिकल कॉलेज की दूरी लगभग चार किलोमीटर होने के कारण रात्रि में आपात स्थिति में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी होती है। जिला अस्पताल की भूमिका भी धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। सिटी अस्पताल की मांग पिछले एक दशक से की जा रही है, जबकि नगर पालिका विस्तार के बाद आबादी और बढ़ चुकी है। इसके साथ ही रात्रि में मेडिकल स्टोरों को शिफ्ट-वाइज खोलने की मांग भी दोहराई गई।
कौशल शर्मा ने जन औषधि केंद्रों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई केंद्र केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जबकि जेनेरिक दवाएं 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं और उनकी प्रभावशीलता भी समान होती है।
जिला महामंत्री प्रीतपाल सिंह ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सपायरी दवाओं के मिलने की बात उठाई और ऐसी दवाओं को तत्काल हटाने की मांग की।
नगर अध्यक्ष प्रशांत जैन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में सीमित संख्या में लैब पंजीकृत हैं, जबकि जनपद में सौ से अधिक पैथोलॉजी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें से कई मानकों की अनदेखी करते हुए संदेहास्पद रिपोर्ट जारी कर रहे हैं। इसी तरह पंजीकृत निजी अस्पतालों और क्लीनिकों से कहीं अधिक अवैध रूप से संचालित संस्थान हैं, जहां न तो आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं। इसके कारण कई बार मरीजों की जान जाने, हंगामे, अस्पताल सील होने और मामलों के दबने जैसी स्थितियां सामने आती हैं।
नगर कोषाध्यक्ष सिद्धार्थ सांवरिया, जिला उपाध्यक्ष नागेंद्र मोदनवाल और नगर मंत्री प्रतीक केसरी ने मांग की कि जिन एंबुलेंसों में मानक के अनुरूप सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें तत्काल बंद कराया जाए। साथ ही एंबुलेंस किराया दर भी निर्धारित की जाए, क्योंकि अधिकांश एंबुलेंसों में आवश्यक उपकरण और व्यवस्थाएं नहीं पाई जाती हैं।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय में डिजिटल एक्स-रे मशीन को शीघ्र चालू कराने की मांग की गई, ताकि मरीजों को बाहर निजी केंद्रों पर पैसे खर्च न करने पड़ें।
बैठक में कौशल शर्मा, प्रीतपाल सिंह, प्रशांत जैन, प्रतीक केसरी, सिद्धार्थ सांवरिया, नागेंद्र मोदनवाल, अभिषेक गुप्ता, अमित अग्रवाल सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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