सिरसा, 28 दिसंबर (एम.पी. भार्गव)धर्मनगरी सिरसा के वीर महाराणा प्रताप नगर (जैन फैक्ट्री के पास, पीर बस्ती) में आज से श्रीमद्भागवत कथा का मंगलमय शुभारंभ हुआ। कथा के पहले ही दिन संपूर्ण क्षेत्र “राधे–राधे” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया।
भव्य कलश यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर आयोजित भव्य कलश यात्रा ने सभी का मन मोह लिया। सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति ने सिर पर मंगल कलश धारण कर नगर भ्रमण किया।
शास्त्रों के अनुसार कलश यात्रा वातावरण की शुद्धि और ईश्वरीय शक्तियों के आह्वान का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि जिस मार्ग से यह यात्रा गुजरती है, वह भूमि तीर्थ के समान पवित्र हो जाती है।
मुख्य अतिथि का सम्मान
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री मनोज बंसल (प्रधान, श्री मेहंदीपुर बालाजी मंडल) ने सपरिवार एवं मंडल के सदस्यों के साथ सहभागिता की। व्यास पीठ द्वारा उन्हें एवं उनके सहयोगियों को अंगवस्त्र और ‘श्री राम नाम लेखन पुस्तिका’ भेंट कर सम्मानित किया गया। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और अधिक बढ़ गई।
प्रथम दिवस की कथा: भक्ति का पुनर्जागरण
व्यास पीठ से पूज्य दीदी श्री ने श्रीमद्भागवत महात्म्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा साक्षात् श्रीकृष्ण का शब्दमयी स्वरूप है।
भक्ति–नारद संवाद के माध्यम से उन्होंने समझाया कि कलयुग में भागवत श्रवण ही वह सरल और प्रभावी मार्ग है, जिससे अशांत मन को शांति मिलती है और सुप्त भक्ति पुनः जागृत होती है।
संकीर्तन में झूमे श्रद्धालु
प्रथम दिन की आरती के पश्चात पूरा पांडाल भक्ति और उल्लास से भर उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य-संकीर्तन करते नजर आए। ऐसा प्रतीत हुआ मानो नंदगांव की अलौकिक मस्ती रानियां रोड पर सजीव हो उठी हो।
समाज के सहयोग से राष्ट्र उत्थान का संकल्प
इस श्रीमद्भागवत कथा की विशेषता यह है कि इसका कोई व्यक्तिगत मुख्य आयोजक नहीं है। यह आयोजन ठाकुर जी की कृपा से संतों और समाज के सामूहिक सहयोग द्वारा संपन्न हो रहा है। कथा का उद्देश्य राष्ट्र उत्थान, गौ-रक्षा और समाज में संस्कारों का बीजारोपण करना है।
कथा के आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
