भारत में हर साल लाखों लोग टाइफाइड से प्रभावित होते हैं। यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो Salmonella typhi नामक जीवाणु के कारण होता है और आमतौर पर दूषित पानी या भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। सही और समय पर इलाज से टाइफाइड पूरी तरह ठीक हो सकता है, लेकिन कई बार मरीज और उनके परिजन यह समझ नहीं पाते कि बीमारी वास्तव में ठीक हो रही है या नहीं। इस विषय पर एस्थेटिक्स एंड वेलनेस के चिकित्सा निदेशक डॉ. प्रखर पचौली ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
क्या है टाइफाइड?
टाइफाइड एक सिस्टेमिक इंफेक्शन है, यानी यह केवल पाचन तंत्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है। संक्रमण के शुरुआती दिनों में शरीर में सूक्ष्म सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ जाती है, जिससे तेज बुखार, कमजोरी, पेट दर्द, सिरदर्द और सुस्ती जैसे लक्षण सामने आते हैं।
आमतौर पर टाइफाइड का इंक्यूबेशन पीरियड 6 से 30 दिन तक का होता है, यानी संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में इतना समय लग सकता है।
कैसे पहचानें कि टाइफाइड ठीक हो रहा है?
डॉ. प्रखर पचौली के अनुसार, केवल बुखार का उतरना यह साबित नहीं करता कि टाइफाइड पूरी तरह ठीक हो गया है। बीमारी में सुधार का आकलन शरीर की समग्र स्थिति और लैब रिपोर्ट्स के आधार पर किया जाता है।
सुधार के प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं—
बुखार का पैटर्न बदलना और धीरे-धीरे कम होना
शरीर में दर्द और कमजोरी में कमी आना
भूख का लौटना
सिरदर्द और पेट दर्द में राहत मिलना
नींद और ऊर्जा स्तर का बेहतर होना
सही एंटीबायोटिक शुरू होने के 3 से 5 दिन के भीतर आमतौर पर बुखार कम होने लगता है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
लैब रिपोर्ट से कैसे होता है सुधार का आकलन?
क्लिनिकल लक्षणों के साथ-साथ जांच रिपोर्ट भी यह तय करती हैं कि संक्रमण खत्म हो रहा है या नहीं।
CBC (Complete Blood Count): WBC काउंट का धीरे-धीरे सामान्य होना
CRP और ESR: सूजन से जुड़े ये मार्कर घटने लगें तो यह सकारात्मक संकेत है
ब्लड कल्चर रिपोर्ट: संक्रमण के स्रोत का खत्म होना
इलाज के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
डॉक्टरों का कहना है कि एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है। कई मरीज लक्षणों में सुधार देखते ही दवा बंद कर देते हैं, जिससे संक्रमण दोबारा उभर सकता है और दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (ड्रग रेजिस्टेंस) विकसित हो सकती है। इसके साथ ही पर्याप्त आराम, पानी और हल्का भोजन भी इलाज का अहम हिस्सा है।
डॉक्टरों की सलाह—
दवाइयों का कोर्स पूरा करें
खूब पानी और ORS लें
तेल-मसाले, डेयरी और स्ट्रीट फूड से बचें
पर्याप्त आराम करें
खतरे के संकेत जिन पर तुरंत ध्यान दें
बुखार कम होने के बाद फिर से बढ़ना
पेट में तेज दर्द
उल्टी या मल में खून आना
मल का रंग काला होना
अत्यधिक सुस्ती, चक्कर या भ्रम की स्थिति
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि यह आंत फटने (intestinal perforation) या अंदरूनी रक्तस्राव जैसी गंभीर जटिलताओं का संकेत हो सकता है।
टाइफाइड से बचाव कैसे करें?
हमेशा उबला या शुद्ध पानी पिएं
घर का ताजा और स्वच्छ भोजन करें
हाथ धोने और साफ-सफाई की आदत डालें
संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन या भोजन साझा न करें
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से टाइफाइड का टीका लगवाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी, समय पर इलाज और सावधानी बरतकर टाइफाइड से न केवल बचा जा सकता है, बल्कि इसकी जटिलताओं से भी खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें
