दिल्ली एनसीआर, फरवरी 2026। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जेनरेटिव एआई के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी शासन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा के लिए SFLC.in ने ब्रिटेन की संस्था Global Partners Digital के सहयोग से ग्लोबल साउथ के विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया। इस बैठक में एआई विनियमन, जवाबदेही और मानवाधिकारों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ आयोजित इस बैठक में लगभग 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें कानून निर्माता, नीति-निर्माता, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, उद्योग विशेषज्ञ, शोधकर्ता और तकनीकी शासन विशेषज्ञ शामिल थे। ये विशेषज्ञ एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए थे।
ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप नीतियों की मांग
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में कई डिजिटल प्लेटफॉर्म शासन नियम ग्लोबल साउथ की परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक स्थिति, भाषाई विविधता और संस्थागत सीमाओं को ध्यान में रखते हुए नई नीतियों की आवश्यकता है। जेनरेटिव एआई के बढ़ते उपयोग के साथ सामग्री संयमन की जिम्मेदारी, दायित्व निर्धारण, चुनावी सुरक्षा और उपयोगकर्ता संरक्षण जैसे नए प्रश्न सामने आ रहे हैं।
लोकतंत्र और पारदर्शिता पर एआई का प्रभाव
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने मतदाता डेटा, अनुवाद और चुनावी प्रक्रियाओं में एआई के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के बिना एआई का उपयोग लोकतंत्र में विश्वास को कमजोर कर सकता है। उन्होंने एआई विनियमन को जलवायु परिवर्तन जितनी गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
मानवाधिकार और जवाबदेही पर जोर
संयुक्त राष्ट्र की बी-टेक परियोजना की सलाहकार इसाबेल एबर्ट ने व्यवसाय और मानवाधिकार के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए सरकारों और कंपनियों की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकारों का दायित्व नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, जबकि कंपनियों को मानवाधिकारों का सम्मान करना और उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियां सामने आईं
बैठक में दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों की चुनौतियों को साझा किया। इंडोनेशिया में डीपफेक सामग्री से जुड़े मामलों, ब्राजील में चुनावी निष्पक्षता पर एआई के प्रभाव और अफ्रीकी देशों में तकनीकी संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं पर चर्चा की गई।
समावेशी और जवाबदेह एआई शासन की आवश्यकता
विशेषज्ञों ने सहमति व्यक्त की कि एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पारंपरिक इंटरनेट कानूनों से आगे बढ़कर नई और प्रभावी नीतियां बनाना जरूरी है। इसके लिए वैश्विक सहयोग, समावेशी दृष्टिकोण और मानवाधिकार आधारित एआई शासन प्रणाली विकसित करना समय की मांग है।
एसएफएलसी.इन ने इस अवसर पर डिजिटल अधिकारों की रक्षा और एआई विनियमन में ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतियों और सहयोग के माध्यम से एआई को मानवता और समाज के हित में सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से उपयोग किया जा सकता है।
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