नई दिल्ली, 19 मई : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को लेकर सोमवार को दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई और सितंबर 2025 तक सभी पद भरने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्जल भुयां की पीठ ने कहा कि
“कुल 204 पदों में से अभी तक केवल 83 ही भरे गए हैं। जब दिल्ली सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण से प्रभावित है, तो ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”
पीठ ने आदेश दिया कि राज्य सरकार 15 अक्टूबर, 2025 तक हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करे। यदि समय-सीमा तक सभी पद नहीं भरे जाते हैं तो यह “गंभीर अवमानना” (aggravated contempt) का मामला माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से वकील ने छह महीने का समय मांगा और आश्वासन दिया कि वर्ष के अंत तक पद भर दिए जाएंगे।
इस पर पीठ ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा:
“वर्ष के अंत तक क्यों? बोर्ड सरकार द्वारा गठित है, तो सरकार कैसे कह सकती है कि उसे छह महीने लगेंगे? हलफनामे में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी, विज्ञापन कब जारी होगा आदि।”
55 प्रतिशत पद खाली, समिति लगभग निष्क्रिय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के 55% पद खाली हैं, और यह चौंकाने वाली स्थिति है।
“ऐसा लगता है मानो यह संस्था लगभग निष्क्रिय (virtually defunct) हो चुकी है।”
चार राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस
इससे पहले 8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को भी फटकार लगाई थी और मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस जारी किया था। अदालत ने पूछा था कि अगस्त 2024 के आदेश के बावजूद, 30 अप्रैल 2025 तक नियुक्तियां क्यों नहीं हुईं।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आगामी रिक्तियों की प्रक्रिया छह महीने पहले से शुरू की जानी चाहिए।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और CAQM पर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) में भी 21 प्रतिशत पद खाली होने पर नाराजगी जताई और इन्हें अगस्त 2025 तक भरने के निर्देश दिए।
साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की कार्यप्रणाली और उपकरणों की स्थिति पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
CAQM एक अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करे
जुलाई के अंत तक CPCB और संबंधित राज्य बोर्डों को सिफारिश भेजे
उसके अनुसार नई तकनीक और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश दिल्ली समेत उत्तर भारत में प्रदूषण नियंत्रण के ढांचे की खस्ताहाल स्थिति को उजागर करता है। कोर्ट ने साफ किया कि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं है और अगर समयसीमा में सुधार नहीं हुआ, तो अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।
यह फैसला प्रदूषण के खिलाफ सरकारी मशीनरी को सक्रिय करने की एक कड़ी कानूनी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
