एसबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के ऋण खाते को ‘धोखाधड़ी’ घोषित किया, अनिल अंबानी का नाम आरबीआई को भेजा
मुंबई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने संकटग्रस्त टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के ऋण खाते को “धोखाधड़ी” (Fraud) घोषित कर दिया है और कंपनी के पूर्व निदेशक अनिल अंबानी का नाम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को रिपोर्ट किया है। यह निर्णय 23 जून 2025 को RCom को भेजे गए पत्र के माध्यम से लिया गया।
यह कदम अन्य बैंकों द्वारा भी अपनाए जाने की संभावना है जिन्होंने RCom को ऋण दिया था। नियामकीय फाइलिंग में RCom ने बताया कि कंपनी और उसकी सहयोगी इकाइयों को कुल ₹31,580 करोड़ का ऋण मिला था।
धोखाधड़ी की पुष्टि और जटिल फंड मूवमेंट
एसबीआई ने ऋण के उपयोग में गड़बड़ी और कंपनी समूह के भीतर फंड के जटिल लेनदेन को धोखाधड़ी का आधार बताया है। बैंक ने कहा कि RCom द्वारा ऋण दस्तावेजों की शर्तों का पालन नहीं किया गया और स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा। इसके आधार पर बैंक की “धोखाधड़ी पहचान समिति” ने खाता फ्रॉड घोषित किया।
ऋण का दुरुपयोग और लेन-देन पर सवाल
फाइलिंग के अनुसार, कुल ऋण का लगभग 44% यानी ₹13,667.73 करोड़ अन्य ऋणों की अदायगी में, जबकि 41% यानी ₹12,692.31 करोड़ जुड़े पक्षों को भुगतान में इस्तेमाल किया गया। ₹250 करोड़ का एक ऋण, जो डैना बैंक से वैधानिक देनदारियों के लिए लिया गया था, उसे RCom समूह की कंपनी RCIL को अंतर-निगमीय जमा (ICD) के रूप में स्थानांतरित किया गया और फिर ECB ऋण चुकाने में लगाया गया।
इसके अलावा, IIFCL द्वारा पूंजीगत व्यय के लिए ₹248 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया, लेकिन उसमें से ₹63 करोड़ RITL और ₹77 करोड़ RIEL को ऋण चुकाने के लिए दिए गए, जिनका उपयोग सीधे न होकर RCIL के माध्यम से हुआ। यह फंड का दुरुपयोग और विश्वास का उल्लंघन माना गया।
इंट्रा-डे ट्रांजेक्शन से फर्जीवाड़े की आशंका
समिति ने यह भी बताया कि RCom समूह ने ₹100 करोड़ की इंट्राडे लिमिट का उपयोग करके दिन में कई बार विभिन्न समूह कंपनियों (RWSL, RCIL आदि) के बीच धन का लेन-देन किया, जो सामान्य व्यापारिक व्यवहार नहीं माना जा सकता। यह खातों में हेरफेर और फर्जी प्रविष्टियों के माध्यम से फंड डायवर्जन का संकेत देता है।
अनिल अंबानी पर भी असर
RBI की गाइडलाइन के अनुसार, धोखाधड़ी करने वाले उधारकर्ता, प्रमोटर और पूर्णकालिक निदेशक अगले पांच वर्षों तक किसी भी बैंक, सरकारी एनबीएफसी या वित्तीय संस्थान से ऋण नहीं ले सकते, जब तक कि पूरा गबन किया गया धन चुकाया न जाए।
अदालत की निगरानी में RCom
RCom जून 2019 से कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में है और इसके संचालन व संपत्तियों की जिम्मेदारी NCLT द्वारा नियुक्त रेजोल्यूशन प्रोफेशनल अनिश निरंजन ननावटी को सौंपी गई है। एसबीआई द्वारा उल्लिखित ऋण CIRP से पूर्व के हैं और इन्हें समाधान योजना या परिसमापन के माध्यम से निपटाया जाएगा।
