मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर कार्यक्षेत्र सुरक्षा मजबूत करने के लिए सेव्हलाइफ फाउंडेशन और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने अभियंताओं को दिया प्रशिक्षण
पुणे, जनवरी 2026 — मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर कार्यक्षेत्र की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सेव्हलाइफ फाउंडेशन ने अपने जीरो फेटैलिटी कॉरिडोर (ZFC) कार्यक्रम के तहत 20 जनवरी 2026 को एक विशेष अभियंता प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस पहल का लक्ष्य उच्च जोखिम वाले सड़क कॉरिडोरों पर सुरक्षा प्रथाओं को मजबूत कर रोके जा सकने वाले सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करना है।
यह प्रशिक्षण आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें सुरक्षित सड़क कार्यक्षेत्र प्रबंधन के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं को शामिल किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सक्रिय निर्माण और रखरखाव कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाना और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना रहा।
कार्यक्रम में एमएसआरडीसी (महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) की कार्यकारी अभियंता श्रीमती शैलजा पाटील मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा,
“सड़क सुरक्षा प्रबंधन में जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई बेहद जरूरी है। एक्सप्रेसवे पर स्थापित एसओएस सिस्टम के साथ-साथ मैं दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए फर्स्ट एड बॉक्स शुरू करने का भी प्रस्ताव रखती हूं, जिससे हादसों के प्रभाव को कम किया जा सके।”
94.5 किलोमीटर लंबा मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे भारत का पहला 6-लेन एक्सप्रेसवे है, जो राज्य में कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को मजबूती देता है। सेव्हलाइफ फाउंडेशन ने वर्ष 2016 में इस कॉरिडोर पर ZFC कार्यक्रम के तहत काम शुरू किया था। 31 दिसंबर 2023 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 58 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हाल ही में महाराष्ट्र परिवहन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों में मौतों की संख्या में 26 प्रतिशत की गिरावट आई है — जो 2024 में इसी अवधि के 82 से घटकर 2025 में 61 रह गई।
प्रशिक्षण के प्रमुख विषयों में शामिल थे—
दुर्घटना जोखिम कम करने के लिए कार्यक्षेत्रों की योजना और प्रबंधन
ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान, बैरियर और साइन बोर्ड्स का प्रभावी उपयोग
सुरक्षित डायवर्जन और हादसा रोकथाम से जुड़ी केस स्टडी
ऑन-ग्राउंड सुरक्षित प्रक्रियाओं पर इंटरैक्टिव सत्र
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम कार्यक्षेत्र प्रबंधन पद्धतियां
इसके अलावा, रखरखाव और निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षित ट्रैफिक प्रबंधन और कार्यक्षेत्र स्थापित करने पर विशेष मॉड्यूल भी सत्र का हिस्सा रहे।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और सीएसआर मार्केटिंग प्रमुख शीना कपूर ने कहा,
“आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में हम सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम उपायों में अग्रणी बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सेव्हलाइफ फाउंडेशन के साथ हमारा सहयोग शून्य-घातक कॉरिडोर के लक्ष्य को और मजबूत करता है। यह प्रशिक्षण सड़क इंजीनियरिंग से जुड़े पेशेवरों के कौशल को बढ़ाने और अनमोल जीवन बचाने की दिशा में एक अहम कदम है।”
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले अभियंताओं को भागीदारी प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।
सेव्हलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ पियूष तिवारी ने कहा,
“एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना जोखिम कम करने में सुव्यवस्थित कार्यक्षेत्रों की अहम भूमिका होती है। यह प्रशिक्षण अभियंताओं को व्यावहारिक उपकरण और सर्वोत्तम पद्धतियां प्रदान करता है, जिससे सुरक्षा परिणामों में सुधार हो सके। यह पहल भारतीय सड़कों पर जीवन बचाने की हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
सेव्हलाइफ फाउंडेशन के लिए मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे एक प्रमुख फोकस क्षेत्र बना हुआ है। इंजीनियरिंग सुधार, प्रवर्तन प्रशिक्षण और ट्रॉमा केयर को मजबूत करने जैसी पहलों के जरिए फाउंडेशन एक्सप्रेसवे पर शून्य मृत्यु के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
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