संत रामपाल जी महाराज की “अन्नपूर्णा मुहिम” से गरीबों को मिल रही नई उम्मीद

हरियाणा से शुरू हुई सेवा अब पंजाब के अमृतसर तक पहुँची — ज़रूरतमंदों तक पहुँचा राशन व सहायता सामग्री भुखमरी, गरीबी और आत्महत्या रोकने के लिए शुरू हुआ अभियान — “कोई भूखा न सोए” संदेश के साथ

अमृतसर। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से शुरू हुई “अन्नपूर्णा मुहिम” अब पंजाब के अमृतसर ज़िले तक पहुँच चुकी है। इस मुहिम का उद्देश्य गरीब, असहाय और ज़रूरतमंद परिवारों तक भोजन, वस्त्र, मकान और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाना है।

अमृतसर ज़िले की तहसील अजनाला के गांव मलिकपुर में हाल ही में विशेष सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ बाढ़ प्रभावित परिवारों को राशन और सहायता सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर दीपक महाराज (फतेहगढ़ साहिब) और लवलीन सिद्धू ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से यह सेवा अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अजनाला क्षेत्र में बाढ़ के चलते फसलों को भारी नुकसान हुआ था। ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए फसलों से पानी निकालने हेतु बड़ी मोटर लगाने और लंबी पाइपलाइन बिछाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, जिसकी लागत लगभग 19 लाख रुपये है। इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों की खेतों में जलभराव की समस्या को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

हरियाणा में शुरू हुई इस मुहिम के तहत अब तक 200 से अधिक गाँवों में किसानों को पाइप, मोटर और आवश्यक कृषि सामग्री दी जा चुकी है, जिससे वे दोबारा खेती शुरू कर चुके हैं। अब यह मुहिम पंजाब के विभिन्न ज़िलों में भी सक्रिय रूप से चलाई जा रही है।

“अन्नपूर्णा मुहिम” की शुरुआत एक हृदयविदारक घटना के बाद हुई थी, जब इलाज के अभाव में एक गरीब परिवार ने आत्महत्या कर ली थी। उस घटना के बाद संत रामपाल जी महाराज ने संकल्प लिया कि कोई भी गरीब भूख या लाचारी से अपनी जान न दे। तब से यह मुहिम “कोई भूखा न सोए” के संकल्प के साथ देशभर में निरंतर चल रही है।

इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को 25 किलो आटा, 5 किलो चावल, 4 किलो चीनी, चार प्रकार की दालें, 2 लीटर सरसों का तेल, चायपत्ती, साबुन, मसाले, आलू, प्याज, बेसन और दलिया जैसी उच्च गुणवत्ता की सामग्री दी जाती है। बच्चों के लिए दूध पाउडर और पौष्टिक आहार भी शामिल किया जाता है।

संत रामपाल जी महाराज का संदेश है — “अगर ज़रूरत पड़े तो हम खुद दो रोटियाँ कम खा लें, लेकिन अपने गाँव या शहर में कोई भूखा न सोए।” इसी प्रेरणा से उनके सेवक गाँव–गाँव जाकर सर्वे कर रहे हैं और ज़रूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुँचा रहे हैं।

यह अभियान अब केवल हरियाणा और पंजाब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भारत और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भी फैल चुका है। “अन्नपूर्णा मुहिम” ने अब तक हजारों परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है और मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण बन गई है।

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