लखनऊ में RMLIMS में क्षय रोग पर RTPMU स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा किए नवीनतम उपचार व निदान के पहलू
लखनऊ: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में पल्मोनरी एवं एक्स्ट्रा-पल्मोनरी क्षय रोग पर RTPMU स्तर के व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में चिकित्सा महाविद्यालयों के संकाय सदस्यों, जिला क्षय रोग अधिकारियों (DTOs) एवं निजी चिकित्सकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से सैकड़ों प्रतिभागियों की उपस्थिति रही, जो क्षय रोग उन्मूलन के प्रति मजबूत शैक्षणिक सहभागिता को दर्शाता है। इस आयोजन को पल्मोनरी मेडिसिन विभाग, RMLIMS द्वारा क्वालिटी सेल RTPMU लखनऊ के सहयोग से, स्टेट टीबी सेल, उत्तर प्रदेश, नेशनल टीबी उन्मूलन कार्यक्रम एवं HLFPPT (प्रोजेक्ट SSHAKTI) के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संरक्षक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह, निदेशक RMLIMS रहे। इस अवसर पर पद्मश्री प्रो. (डॉ.) राजेन्द्र प्रसाद, प्रो. (डॉ.) सूर्यकांत, प्रो. (डॉ.) प्रद्युमन सिंह, प्रो. (डॉ.) विक्रम सिंह, प्रो. (डॉ.) अरविंद कुमार सिंह एवं प्रो. (डॉ.) सुब्रत चंद्र सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जी.वी. सिंह एवं आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। अपने स्वागत भाषण में प्रो. अजय कुमार वर्मा ने क्षय रोग के ऐतिहासिक विकास, इसके प्रसार एवं मृत्यु दर को कम करने में निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि प्रो. सी.एम. सिंह ने कहा कि अब टीबी के उपचार में आधुनिक आणविक जांचों के माध्यम से सटीक निदान संभव हो गया है, जिससे साक्ष्य-आधारित उपचार को बढ़ावा मिला है। उन्होंने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत टीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पद्मश्री प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन दशकों में टीबी प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव आया है, जबकि प्रो. सूर्यकांत ने शीघ्र पहचान और समय पर उपचार को मृत्यु दर कम करने का प्रमुख आधार बताया।
कार्यक्रम में टीबी के विभिन्न आयामों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। अंत में डॉ. हेमंत अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन कर सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्य पेशेवरों को क्षय रोग के नवीनतम निदान, उपचार एवं प्रबंधन की जानकारी देने में महत्वपूर्ण साबित हुआ और टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक सशक्त कदम माना गया।
