नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की ताज़ा बैठक के नतीजे सामने आ गए हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार (8 अप्रैल 2026) को घोषणा करते हुए बताया कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत तय होती है, जिसका असर सीधे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों पर पड़ता है।
अर्थव्यवस्था संतुलन में
रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला इस बात का संकेत है कि फिलहाल देश की अर्थव्यवस्था संतुलित स्थिति में है। विकास दर और महंगाई दोनों ही नियंत्रण में हैं। इससे पहले आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.3% लगाया था।
पिछले एक साल में मिली राहत
पिछले एक साल के दौरान एमपीसी ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कुल चार बार ब्याज दरों में कटौती की थी। फरवरी, अप्रैल, जून और दिसंबर 2025 में दरें घटाई गई थीं। लगातार कटौती के बाद इस बार दरों को स्थिर रखना “रुको और देखो” रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आपकी EMI पर क्या असर?
अगर आप 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो मौजूदा दरों के अनुसार प्रभावी ब्याज करीब 7.25% बैठता है। ऐसे में आपकी मासिक ईएमआई लगभग 40,000 रुपये के आसपास रहेगी। चूंकि इस बार रेपो रेट में बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए EMI में भी फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा।
नए और पुराने कर्जदारों के लिए संकेत
नए कर्ज लेने वालों के लिए यह समय स्थिरता का है। वहीं फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वालों को आरबीआई के फैसलों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि उनकी ब्याज दर सीधे रेपो रेट से प्रभावित होती है।
