दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल अवॉर्ड’ से सम्मानित हुए रवि किशन, फिल्म ‘लापता लेडीज’ में शानदार अभिनय के लिए मिला सम्मान — भोजपुरी सिनेमा का नाम किया रोशन
मुंबई। ;भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार व गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन को उनकी बेहतरीन अदाकारी के लिए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें ‘दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड 2025’ में बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल के लिए सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनकी चर्चित फिल्म ‘लापता लेडीज’ में निभाए गए यादगार किरदार के लिए मिला है।
यह सम्मान मिलने के साथ ही रवि किशन ने एक बार फिर भोजपुरी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। इससे पहले उन्हें इसी फिल्म के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है, जिससे उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
शनिवार की रात मुंबई में हुए इस समारोह में उनके नाम की घोषणा होते ही पूरे भोजपुरी फिल्म जगत में उत्साह का माहौल बन गया। रवि किशन के प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएं दीं, वहीं गोरखपुर में उनके समर्थकों ने जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं।
रवि किशन बोले — “यह मेरे माता-पिता और गुरु गोरखनाथ बाबा का आशीर्वाद है”
पुरस्कार मिलने के बाद रवि किशन भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “यह सम्मान मेरे माता-पिता, समर्थकों और गुरु गोरखनाथ बाबा के आशीर्वाद से मिला है। मुझे हमेशा प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलती है।”
उनके जनसंपर्क अधिकारी पवन दुबे ने बताया कि यह सम्मान रवि किशन के कठिन परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा, “रवि किशन ने अपनी मेहनत से भोजपुरी सिनेमा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है और आज हर युवा कलाकार उनके संघर्ष से प्रेरणा ले रहा है।”
33 साल का फिल्मी सफर — 200 से अधिक फिल्मों में काम
जौनपुर जिले के केराकत गांव में जन्मे रवि किशन ने मात्र 19 वर्ष की उम्र में फिल्मों की दुनिया में कदम रखा था। तीन दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने भोजपुरी, हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं की करीब 200 फिल्मों में अभिनय किया है।
‘लापता लेडीज’ में उनकी सधी हुई अदाकारी ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीत लिया। अब ‘दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल अवॉर्ड 2025’ ने उनकी मेहनत और प्रतिभा पर मुहर लगा दी है।
रवि किशन ने एक बार फिर साबित किया है कि सच्ची लगन और जुनून से सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है — और भोजपुरी सिनेमा अब किसी से पीछे नहीं।
