रामपुर: शनिवार को दोपहर 1:30 बजे डिग्री कॉलेज रोड स्थित शाह बेगम मैरिज हॉल में गुलशन वेलफेयर सोसाइटी के तत्वाधान में ” विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका ” विषय पर “महिला सम्मेलन ” का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पूर्व कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीक़ी, उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल, भाजपा ज़िला अध्यक्ष हरीश गंगवार, महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष पारुल अग्रवाल, अल्पसंख्यक मोर्चा के ज़िला अध्यक्ष वसीम ख़ान आदि मौजूद रहे । संचालन भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी फैसल मुमताज़ ने किया। सम्मेलन में भारत सरकार की ” समर्थ योजना ” के अंतर्गत प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र एवं गिफ्ट भी वितरित किए गए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीक़ी ने कहा कि जब हम विकसित भारत की कल्पना करते हैं, तो उसमें एक ऐसा समाज नज़र आता है जहाँ सभी को समान अधिकार, अवसर और सम्मान प्राप्त हो – खासकर महिलाओं को। महिलाओं के बिना किसी भी राष्ट्र का विकास अधूरा है, क्योंकि वे समाज की रीढ़ होती हैं। आज की महिला सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। वह अंतरिक्ष में उड़ान भर रही है, संसद में निर्णय ले रही है, विज्ञान के प्रयोगशालाओं में शोध कर रही है और देश की अर्थव्यवस्था को गति दे रही है। कल्पना कीजिए, चंद्रयान की सफलता के पीछे भारतीय महिला वैज्ञानिकों की मेहनत रही है। सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाएँ जैसे “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “उज्ज्वला योजना”, “महिला आरक्षण बिल” आदि ने महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त होंगे। हमें एक ऐसा समाज बनाना है जहाँ महिलाएं निडर होकर अपने सपने साकार कर सकें।
पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने महिला सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत में संवैधानिक सुधार और समावेशी सशक्तिकरण का स्वर्णिम समय चल रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के सुरक्षा, समृद्धि, सशक्तिकरण के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक, कृषि, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में सुधार ने भारत को सुशासन का प्रमाणित वैश्विक ब्रांड बना दिया है। उन्होंने कहा कि “संवैधानिक लॉ की साम्प्रदायिक लिन्चिंग” या संवैधानिक कानून की साम्प्रदायिक कुटाई, की सनक -साज़िश, मुल्क और मज़हब दोनों के लिए ख़तरनाक है। कोई भी संवैधानिक सुधार, धार्मिक आस्था के संरक्षण, प्रशासनिक व्यवस्था के सुधार के संकल्प के साथ होता है। उन्होंने कहा कि वक़्फ संशोधन क़ानून, मुल्क की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए है किसी मज़हब की धार्मिक आस्था में हस्तक्षेप नहीं है। संसद का एक्ट है संसद ने ही करेक्ट किया।
