कॉमेडी से दर्शकों को हंसाने वाले अभिनेता राजपाल यादव की निजी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया, जब उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। चेक बाउंस और कर्ज विवाद से जुड़ा यह मामला वर्षों तक चलता रहा और आखिरकार न्यायिक हिरासत तक पहुंच गया। आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा घटनाक्रम और कानूनी टाइमलाइन।
2010: फिल्म के लिए लिया गया लोन
राजपाल यादव ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए करीब 9 करोड़ रुपये का लोन एक निजी फाइनेंसर से लिया।
उन्होंने बतौर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर खुद इसकी जिम्मेदारी ली।
2011–2012: फिल्म फ्लॉप, बढ़ी आर्थिक परेशानी
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई।
EMI और तय भुगतान समय पर नहीं हो सका।
फाइनेंसर की ओर से कानूनी नोटिस भेजा गया।
2013: चेक बाउंस केस दर्ज
भुगतान न होने पर जारी किए गए चेक बाउंस हो गए।
मामला दिल्ली की अदालत पहुंचा।
कोर्ट ने कई बार पेशी के आदेश दिए।
2014–2016: कोर्ट में गैरहाजिरी
राजपाल यादव कई बार अदालत में पेश नहीं हो पाए।
अदालत ने इसे आदेश की अवहेलना माना और सख्त रुख अपनाया।
2018: सजा का आदेश
कोर्ट ने बकाया रकम और जुर्माने को लेकर कड़ा आदेश दिया।
भुगतान न होने की स्थिति में जेल भेजने की चेतावनी दी गई।
2022–2023: मामला फिर सक्रिय
फाइनेंसर ने डिफॉल्ट और धोखाधड़ी के आरोप दोहराए।
राजपाल यादव की आर्थिक स्थिति को लेकर दोबारा सुनवाई हुई।
2024: न्यायिक हिरासत
कोर्ट के आदेश पर राजपाल यादव को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मच गई।
बॉलीवुड से मिला सहारा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोनू सूद ने उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट कर आर्थिक मदद की।
सलमान खान, अजय देवगन और गायक मीका सिंह ने भी निजी तौर पर सहयोग किया।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और बकाया राशि के निपटारे के प्रयास तेज हुए।
रिहाई की पुष्टि
गुरुवार को राजपाल यादव के मैनेजर ने उनकी रिहाई की पुष्टि की।
सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे जेल से बाहर आए।
क्या मामला खत्म हो गया?
हालांकि रिहाई हो चुकी है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। आगे भी अदालती कार्यवाही जारी रह सकती है।
राजपाल यादव का यह मामला बताता है कि फिल्मी चमक-दमक के पीछे आर्थिक और कानूनी चुनौतियां कितनी गंभीर हो सकती हैं। एक सफल अभिनेता के लिए भी कर्ज और कानूनी विवाद किस तरह बड़ी मुश्किल बन सकते हैं, यह इसकी बड़ी मिसाल है।
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