‘रेड 2’ मूवी रिव्यू: अजय देवगन और रितेश देशमुख ने पुरानी कहानी को नए पैकेज में परोसा, दमदार अभिनय ने बचाई लाज

 

मुंबई : कुछ फिल्मों की पहली कड़ी इतनी प्रभावशाली होती है कि दर्शकों की उम्मीदें उसके सीक्वल से बहुत बढ़ जाती हैं। ‘रेड’ के साथ भी यही हुआ था, लेकिन ‘रेड 2’ इस कसौटी पर पूरी तरह खरा नहीं उतरती। अजय देवगन एक बार फिर IRS ऑफिसर अमय पटनायक के रोल में हैं, जबकि इस बार रितेश देशमुख नए अंदाज़ में निगेटिव किरदार में नज़र आते हैं और सबसे ज़्यादा तारीफ के हकदार भी वही हैं।

कहानी: भ्रष्टाचार की गहराई में छुपे राजनीतिक खेल

फिल्म की कहानी अमय पटनायक के 75वें और सबसे कठिन केस के इर्द-गिर्द घूमती है। एक ईमानदार अफसर होते हुए भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं। इसी बीच वे एक बड़े और ताकतवर भ्रष्ट नेता ‘दादा भाई’ (रितेश देशमुख) की जांच शुरू करते हैं। फिल्म में राजनीतिक ताकत, पारिवारिक टकराव और भ्रष्टाचार की परतें दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन कहानी में नयापन नहीं है और कई मोड़ काफी देर से आते हैं।

अभिनय: रितेश देशमुख की निगेटिव भूमिका बनी फिल्म की जान

अजय देवगन अपने रोल में सहज और प्रभावशाली हैं, लेकिन चौंकाते हैं रितेश देशमुख। अपने पहले निगेटिव रोल में उन्होंने बेहतरीन काम किया है। हालांकि उनके संवादों में नाटकीयता अधिक है, लेकिन उनके प्रदर्शन में कोई कमी नहीं।

वाणी कपूर और इलियाना डिक्रूज़ की स्क्रीन स्पेस बेहद कम है, लेकिन उन्होंने अपनी भूमिकाओं को निभाया है। सौरभ शुक्ला की मौजूदगी पुराने दिनों की याद दिलाती है, लेकिन उनका रोल सीमित है। अमित सियाल ने अमय के सहयोगी की भूमिका में जबरदस्त प्रभाव छोड़ा है और कहानी में बड़ा ट्विस्ट भी उन्हीं के ज़रिए आता है। वहीं, सुप्रिया पाठक का अभिनय इस बार अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा और कुछ दृश्यों में उन्होंने ओवरएक्टिंग की है।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष: कमजोर निर्देशन ने किया निराश

राज कुमार गुप्ता के निर्देशन में बनी यह फिल्म पहली ‘रेड’ की तुलना में कमजोर नज़र आती है। फिल्म की शुरुआत धीमी है और गाने फिल्म की रफ्तार में बाधा डालते हैं। एडिटिंग भी और बेहतर हो सकती थी। कहानी का थ्रिलिंग हिस्सा सेकेंड हाफ में आता है, जिससे पहला भाग थोड़ा उबाऊ लगता है।

फैसला: देखने लायक पर पहली ‘रेड’ जैसी नहीं

कुल मिलाकर, ‘रेड 2’ पहली फिल्म जितनी दमदार नहीं है, लेकिन अजय देवगन और रितेश देशमुख का अभिनय इसे एक बार देखने लायक जरूर बना देता है। कहानी में खामियां हैं, रफ्तार धीमी है, लेकिन मनोरंजन की कमी नहीं।

रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5 स्टार)

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