नई टीम पर उठे सवाल: ‘पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी’, आपराधिक छवि के आरोपों से घिरा संगठन

बाराबंकी भाजपा में बवाल: नई कार्यकारिणी पर विरोध, आपराधिक छवि के आरोपों से संगठन में मचा घमासान

  • रिपोर्ट- बाराबंकी शुभम कश्यप

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला कार्यालय में स्थापना दिवस के मौके पर उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर मंत्री सतीश शर्मा समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। इसी बीच अनुसूचित आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की बात कर रहे थे, तभी एक नाराज कार्यकर्ता अचानक खड़ा होकर मंच के पास पहुंच गया और खुलकर विरोध जताने लगा।

उसने आरोप लगाया कि “हम लोग वर्षों से पार्टी से जुड़े हैं, लेकिन आज कोई पूछने वाला नहीं है।” काफी देर तक नोकझोंक चली, जिसके बाद अन्य कार्यकर्ताओं ने उसे शांत कराकर बैठाया।

बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम को कुछ लोग मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी दौरान एमएलसी अंगद सिंह ने कथित तौर पर वीडियो डिलीट करने की बात कही, हालांकि कुछ लोगों ने यह वीडियो बाहर भी साझा कर दिया।

संगठन पर गंभीर आरोप

नई जिला कमेटी के गठन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है। जिलाध्यक्ष राम सिंह वर्मा ‘भुल्लन’, अमित वर्मा और जंगबहादुर पटेल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

अमित वर्मा पर आरोप है कि—

वे पर्दे के पीछे से संगठन को नियंत्रित कर रहे हैं
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं
अपनी पत्नी को संगठन में पद दिलवाया गया
पार्टी फंड के नाम पर धन उगाही में हस्तक्षेप कर रहे हैं
 जंगबहादुर पटेल पर आपराधिक मामलों के आरोप

जंगबहादुर पटेल का नाम भी विवादों में है। उन पर कई गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं।

आरोपों के अनुसार—

वे शराब के नशे में नेताओं से अभद्रता करते हैं
अस्पतालों व अन्य स्थानों से “गुंडा टैक्स” वसूलने के आरोप हैं
जमीन कब्जाने जैसे मामलों में भी नाम जुड़ा रहा है

साथ ही यह भी आरोप है कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उनके खिलाफ संगठन में खुलकर आवाज नहीं उठ पाती।

कार्यकर्ताओं में नाराजगी*

पार्टी के अंदर यह चर्चा तेज है कि जो लोग कभी बूथ स्तर पर सक्रिय नहीं रहे, उन्हें सीधे जिला स्तर की जिम्मेदारी दे दी गई, जिससे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।

नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है—
“जिन लोगों ने अपनी जिंदगी संगठन को दी, आज वही खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।”

प्रदेश नेतृत्व पर टिकी निगाहें

बाराबंकी भाजपा में उठे ये विवाद अब केवल अंदरूनी मतभेद नहीं रह गए हैं, बल्कि संगठन की साख और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि प्रदेश नेतृत्व इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर संगठन में भरोसा बहाल कर पाता है या नहीं।

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