पुरुषों में भी बढ़ सकता है प्रोलैक्टिन हार्मोन, नजरअंदाज किया तो बढ़ सकती है परेशानी

अक्सर प्रोलैक्टिन हार्मोन को महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि इसका संबंध प्रेग्नेंसी और स्तनपान से माना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पुरुषों के शरीर में भी प्रोलैक्टिन हार्मोन मौजूद होता है। जब इसकी मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है, तो यह धीरे-धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, जिन्हें लोग थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। स्टेरिस हेल्थकेयर के डायरेक्टर और सीईओ जीवन कसारा के अनुसार, समय पर पहचान न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

क्या है प्रोलैक्टिन हार्मोन

प्रोलैक्टिन एक हार्मोन है, जो पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलता है। पुरुषों में इसकी सामान्य मात्रा बहुत कम होती है। यह हार्मोन हॉर्मोनल संतुलन, यौन स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को संतुलित रखने में मदद करता है। लेकिन जब इसका स्तर बढ़ जाता है, तो इस स्थिति को हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया कहा जाता है।

पुरुषों में प्रोलैक्टिन बढ़ने के मुख्य कारण

पिट्यूटरी ग्लैंड में गांठ (प्रोलैक्टिनोमा)

अत्यधिक तनाव और नींद की कमी

कुछ दवाइयां, जैसे एंटी-डिप्रेसेंट और ब्लड प्रेशर की दवाएं

थायरॉइड से जुड़ी समस्या

किडनी या लीवर की बीमारी

अत्यधिक शराब या नशे का सेवन

दिखने वाले आम लक्षण

बढ़ा हुआ प्रोलैक्टिन हार्मोन शरीर में कई तरह के बदलाव ला सकता है।

1. यौन समस्याएं

सेक्स ड्राइव में कमी

इरेक्शन में दिक्कत

वीर्य की मात्रा में कमी

बांझपन की संभावना

2. शारीरिक बदलाव

बिना वजह वजन बढ़ना

मांसपेशियों में कमजोरी

लगातार थकान और सुस्ती

पुरुषों में स्तनों का बढ़ना (गायनेकोमैस्टिया)

3. मानसिक और भावनात्मक लक्षण

चिड़चिड़ापन

डिप्रेशन और चिंता

ध्यान केंद्रित करने में परेशानी

आत्मविश्वास में कमी

4. अन्य संकेत

लगातार सिरदर्द

आंखों से जुड़ी समस्याएं (अगर पिट्यूटरी ग्लैंड पर दबाव हो)

बहुत दुर्लभ मामलों में स्तनों से तरल पदार्थ निकलना

क्यों है यह समस्या गंभीर

अगर लंबे समय तक प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ा रहे, तो यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर देता है। इससे न केवल यौन जीवन प्रभावित होता है, बल्कि हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, मांसपेशियों की ताकत घटती है और मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है। कई पुरुष इसे सामान्य कमजोरी समझकर इलाज में देरी कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है।

जांच कैसे होती है

ब्लड टेस्ट से प्रोलैक्टिन लेवल की जांच

थायरॉइड टेस्ट

जरूरत पड़ने पर MRI स्कैन

डॉक्टर की सलाह से ही जांच कराना जरूरी है, क्योंकि गलत समय पर किया गया टेस्ट गलत परिणाम दिखा सकता है।

इलाज और मैनेजमेंट

अच्छी बात यह है कि बढ़ा हुआ प्रोलैक्टिन पूरी तरह कंट्रोल और इलाज योग्य है।

कारण के अनुसार दवाइयां दी जाती हैं

तनाव कम करने और नींद सुधारने की सलाह दी जाती है

लाइफस्टाइल में बदलाव पर जोर दिया जाता है

बहुत गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है (हालांकि यह बहुत कम होता है)

किन बातों का रखें खास ध्यान

बिना डॉक्टर की सलाह दवाइयां न लें

शराब और नशे से दूरी बनाएं

नियमित व्यायाम और योग अपनाएं

लंबे समय से थकान या यौन समस्या हो तो शर्म न करें और डॉक्टर से सलाह लें

पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोलैक्टिन हार्मोन एक साइलेंट समस्या है, जो धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों को प्रभावित करती है। सही समय पर पहचान, जांच और इलाज से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। सेहत से जुड़ी किसी भी परेशानी को हल्के में न लें, क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज है।

 

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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें

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