PCOS कोई टैबू नहीं: इलाज में देरी या हिचकिचाहट न करें

नई रिसर्च में खुलासा – कैफीन से हो सकता है PCOS के लक्षणों में सुधार

नई दिल्ली। महिलाओं में बांझपन का एक बड़ा कारण बनने वाले पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के मामलों में भारत में तेज़ी से वृद्धि देखी जा रही है। अब एक नई उम्मीद जगाते हुए Nature Journal में प्रकाशित ताजा रिसर्च में पाया गया है कि कैफीन का सेवन PCOS के लक्षणों में सुधार ला सकता है।

जानवरों पर हुई रिसर्च में मिला सकारात्मक परिणाम
इस अध्ययन में मोटापे से ग्रसित PCOS ग्रसित चूहों पर प्रयोग कर कैफीन की प्रभावशीलता साबित की गई। CARE Hospitals, हैदराबाद की डॉ मंजुला अनगनी के अनुसार, “कैफीन सीमित मात्रा में insulin sensitivity बढ़ाकर और मेटाबॉलिज्म सुधारकर PCOS के obese मरीजों को लाभ पहुंचा सकता है।”

अमृता अस्पताल, फरीदाबाद की डॉ दीप्ति शर्मा ने भी कहा, “कैफीन lipid metabolism को बढ़ाता है और सूजन को कम करता है, जो insulin resistance वाले PCOS मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है।”

BMI से बढ़ता है खतरा, कैफीन कर सकता है मदद
रिसर्च में यह भी बताया गया कि BMI (बॉडी मास इंडेक्स) जितना बढ़ता है, PCOS का जोखिम भी उतना ही बढ़ता है। ऐसे में वज़न कम करना इस रोग के नियंत्रण का एक अहम उपाय है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि अधिक कॉफी पीने से PCOS और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा कम हो सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों ने संतुलित सेवन की सलाह दी है और कहा कि अधिक मानव परीक्षण की आवश्यकता है।

डॉ तरुणा दुआ, Aakash Healthcare, दिल्ली, ने चेतावनी दी, “बिना नियंत्रण के कैफीन से नींद न आना, घबराहट जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है।”

क्या है PCOS?
PCOS एक हार्मोनल असंतुलन है, जिसमें अंडाशय (ovaries) अधिक मात्रा में एंड्रोजन नामक पुरुष हार्मोन बनाने लगते हैं। इसके कारण महिलाओं में हार्मोन असंतुलन हो जाता है।

प्रमुख लक्षणों में अनियमित मासिक धर्म, अधिक शरीर के बाल (hirsutism), बाल झड़ना, मुंहासे, वजन बढ़ना, त्वचा पर काले धब्बे, स्किन टैग्स, गर्भधारण में दिक्कत और बार-बार गर्भपात शामिल हैं।

PCOS से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अवसाद, चिंता, एंडोमेट्रियल कैंसर जैसी कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले
डॉ दुआ के अनुसार, भारत में PCOS की दर 9 से 36% तक पाई गई है, जो विश्व में सबसे अधिक में से एक है। ICMR की 2021 की स्टडी के अनुसार, किशोरियों में PCOS के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

इस वृद्धि के पीछे शहरीकरण, अनहेल्दी डाइट, मोटापा, तनाव, अनियमित नींद, और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हैं।

सामाजिक टैबू बन रहा है बाधा
भारत में मासिक धर्म और प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर शर्म और चुप्पी की वजह से महिलाएं अक्सर इलाज नहीं करवातीं। डॉ अनगनी कहती हैं, “महिलाओं को खुलकर बोलने और मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।”

डॉ अंशुमाला शुक्ला- कुलकर्णी (कोकिलाबेन हॉस्पिटल) ने कहा, “महिलाएं अक्सर शर्म की वजह से लक्षणों को छिपाती हैं, जिससे इलाज में देरी होती है।”

इलाज और प्रबंधन संभव
PCOS का इलाज संभव नहीं है, लेकिन लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉ शुक्ला कहती हैं, “हर दिन एक घंटे की एक्सरसाइज, प्रोसेस्ड फूड से परहेज़, ज्यादा फल-सब्ज़ियों का सेवन ज़रूरी है।” उन्होंने लो ग्लाइसेमिक फूड लेने और चावल की जगह मिलेट्स खाने की सलाह दी।

5-10% वजन कम करने से भी पीरियड्स नियमित हो सकते हैं और insulin resistance में सुधार होता है।

समय पर इलाज से मां बनना संभव
डॉ कृतिका देवी (Nova IVF, चेन्नई) कहती हैं, “अगर मासिक धर्म नियमित हो जाए, तो महिलाएं नेचुरल कंसीव कर सकती हैं।” एक साल कोशिश के बाद भी गर्भधारण न हो तो डॉक्टर से संपर्क ज़रूरी है।

मानसिक और भावनात्मक सहयोग भी ज़रूरी
डॉ दीप्ति शर्मा ने एक 20 वर्षीय छात्रा का उदाहरण दिया, जिसे पीरियड्स अनियमित, वजन बढ़ना, चेहरे पर बाल और आवाज़ में बदलाव जैसी समस्याएं थीं। सही सलाह, डाइट और एक्सरसाइज से उसने वजन घटाया, पीरियड्स नियमित हुए और आत्मविश्वास लौटा।

PCOS का इलाज सिर्फ दवाओं से नहीं बल्कि समझदारी, जागरूकता, मानसिक सहयोग और लाइफस्टाइल सुधार से संभव है। विशेषज्ञों ने ज़ोर दिया है कि हर महिला की स्थिति अलग होती है, और इसलिए व्यक्तिगत इलाज योजना बनानी चाहिए।
PCOS को टैबू न बनाएं, खुले मन से बात करें, समय रहते इलाज लें और स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

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