निजीकरण का विरोध बना संकट: UPPCL के 87 इंजीनियरों को नोटिस, अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश
पावर कॉर्पोरेशन प्रशासन ने जताई सख्ती, निजीकरण के विरोध पर उठाए सख्त कदम
- रिपोर्ट: मंजय वर्मा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) में निजीकरण के विरोध को लेकर 87 इंजीनियरों को नोटिस जारी किए गए हैं।
पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
विरोध की कीमत चुकाने की तैयारी में इंजीनियर
- निजीकरण के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले इंजीनियरों को नोटिस थमाया गया है।
- पावर कॉर्पोरेशन ने इसे सेवा अनुशासन का उल्लंघन माना है।
- प्रशासन का कहना है कि ड्यूटी पर रहते हुए आंदोलन या विरोध नियमों के खिलाफ है।
UPPCL प्रशासन ने दिखाया सख्त रुख
- पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन ने इस पर अनुशासनात्मक जांच और कार्रवाई का आदेश दिया है।
- सूत्रों के अनुसार, यह सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सस्पेंशन और बर्खास्तगी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
- प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इंजीनियरों में नाराज़गी, यूनियन में हलचल
- नोटिस मिलने के बाद इंजीनियरों और कर्मचारी संगठनों में असंतोष फैल गया है।
- यूनियनों ने बैठक बुलाकर आगे की रणनीति बनाने का निर्णय लिया है।
- यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को दबा रही है।
निजीकरण को लेकर सरकार और इंजीनियरों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। आगामी दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और औद्योगिक आंदोलन का रूप भी ले सकता है। सरकार की सख्ती और कर्मचारियों का विरोध, बिजली व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।
