मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर सर्वदलीय बैठक: विपक्ष ने पहलगाम हमले, ट्रंप के बयान और बिहार SIR का मुद्दा उठाया; सरकार बोली—नियमों के तहत सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार

नई दिल्ली, 20 जुलाई। मानसून सत्र से ठीक पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीन प्रमुख मुद्दों को लेकर घेरा — पहलगाम आतंकी हमला, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान संघर्ष में ‘सीजफायर’ का दावा, और बिहार में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल खड़े किए। विपक्ष ने इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे संसद में जवाब देने की मांग की।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी के इन मुद्दों पर संसद में बयान देने की संभावना कम है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन चर्चा नियमों और संसदीय परंपराओं के तहत ही होगी।

सरकार की ओर से खुलापन, लेकिन ‘नियमों’ की बात
बैठक के बाद रिजिजू ने पत्रकारों से कहा:

“सरकार ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा से पीछे नहीं हटेगी। हम चर्चा के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन नियमों और परंपराओं के तहत।”

उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में शामिल 54 दलों के नेताओं की बातों को गंभीरता से सुना गया, और यह उम्मीद जताई कि मानसून सत्र शांतिपूर्वक और रचनात्मक तरीके से चलेगा।

प्रधानमंत्री की उपस्थिति पर स्पष्टीकरण
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में सदैव उपस्थित रहते हैं, सिवाय विदेश यात्राओं के समय। लेकिन सभी मुद्दों पर जवाब देने की जिम्मेदारी संबंधित कैबिनेट मंत्रियों की होती है।

विपक्ष की मांग: पीएम खुद दें जवाब कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि पहलगाम हमले में खुफिया विफलता को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।

ट्रंप के सीजफायर वाले दावे पर प्रधानमंत्री को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

बिहार में SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं पर चुनाव आयोग और सरकार को सफाई देनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह प्रधानमंत्री की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह इन गंभीर विषयों पर संसद में बोलें।”

आप नेता संजय सिंह ने बिहार में SIR को “मतदाता घोटाला” करार दिया और ट्रंप के बयान पर भी सवाल उठाया।

समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने कहा कि “पहलगाम हमले पर उपराज्यपाल ने खुद खुफिया विफलता मानी है, यह गंभीर मुद्दा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कभी पाकिस्तान के मामले में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की, ऐसे में ट्रंप के दावे पर सफाई जरूरी है।

सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास और एनसीपी-शरद पवार गुट की सुप्रिया सुले ने भी प्रधानमंत्री से जवाब की मांग की। सुले ने कहा:

“यदि प्रधानमंत्री इन विषयों पर संसद में बोलते हैं तो सभी को अच्छा लगेगा।”

ऑपरेशन सिंदूर पर रक्षा मंत्री का संभावित बयान
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तृत बयान दे सकते हैं। इसके अलावा, सरकार विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भी विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर संसद में पेश कर सकती है।

मणिपुर मुद्दा भी उठा
गौरव गोगोई ने मणिपुर की स्थिति पर भी ध्यान दिलाया और कहा कि:

“प्रधानमंत्री ने छोटे-छोटे देशों की यात्रा की है, लेकिन मणिपुर जैसे छोटे राज्य में जाना जरूरी नहीं समझा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

सरकार लाएगी 17 प्रमुख विधेयक
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि मानसून सत्र में 17 प्रमुख विधेयक लाए जाएंगे, जिनकी जानकारी जल्द साझा की जाएगी। उन्होंने छोटे दलों को भी पर्याप्त बोलने का समय देने की बात कही।

मानसून सत्र से पहले सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत साफ नजर आ रहे हैं। जहां विपक्ष प्रधानमंत्री से सीधे जवाब की मांग कर रहा है, वहीं सरकार ने संवैधानिक नियमों और परंपराओं के तहत चर्चा की सहमति दी है। सत्र के दौरान इन मुद्दों पर गरमा-गरमी तय मानी जा रही है।

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