अमृतसर :किसान–मज़दूर मोर्चे के आह्वान पर 13 जनवरी को लोहड़ी के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मोर्चे के नेताओं ने अमृतसर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। इसी क्रम में अमृतसर बस अड्डे पर पीआरटीसी, सरकारी रोडवेज एवं निजी बसों के ड्राइवरों व कर्मचारियों के सहयोग से एक रोष मार्च भी निकाला गया।
मोर्चे के प्रमुख नेता सरवन सिंह पंधेर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बिजली निजीकरण, मनरेगा के बजट में कटौती और चार लेबर कोड किसान–मज़दूरों के लिए बेहद घातक साबित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की किसान–मज़दूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए बसों पर पंफलेट चिपकाए गए तथा लोगों से अपील की गई कि लोहड़ी के दिन इन नीतियों की प्रतियों को जलाकर विरोध दर्ज कराएं।
सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बिजली बोर्ड का निजीकरण केवल किसानों का नहीं, बल्कि पूरे पंजाब का गंभीर मुद्दा है। वहीं मनरेगा के बजट में 40 प्रतिशत की कटौती कर मज़दूरों से उनका रोज़गार छीना जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि बीज, बाज़ार और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में कॉरपोरेट कंपनियों की बढ़ती दखलअंदाज़ी देश की खेती को पूरी तरह तबाह कर देगी।
उन्होंने कहा कि लागू किए गए चार लेबर कोड मज़दूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं। साथ ही शहरी जनता को भी आगाह करते हुए पंधेर ने कहा कि ऑनलाइन व्यापार और बड़े शॉपिंग मॉलों के विस्तार से छोटी दुकानों का अस्तित्व खतरे में है, इसलिए शहर और गांव के लोगों को एकजुट होकर कॉरपोरेट नीतियों के खिलाफ संघर्ष करना होगा।
कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, नशे की बढ़ती समस्या और लगातार हो रही गोलीबारी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को पूरी तरह विफल बताया। सरवन सिंह पंधेर ने आगामी संघर्षात्मक कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए कहा कि 18 जनवरी को मुख्यमंत्री के मजीठिया दौरे का विरोध किया जाएगा, 21–22 जनवरी को स्मार्ट मीटर बिजली घरों में जमा करवाए जाएंगे और 5 फरवरी को विधायकों व मंत्रियों के घरों के सामने एक दिवसीय रोष धरना दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकारों के साथ कई दौर की बैठकों के बावजूद मांगों का समाधान नहीं हो रहा है, इसलिए आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। शंभू–खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान का मुआवज़ा, बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़ा, पराली से जुड़े मामलों को रद्द करना तथा घायल और शहीद किसानों–मज़दूरों को न्याय दिलाना किसान–मज़दूर मोर्चे की प्रमुख मांगों में शामिल है।
khabre junction
