सिर्फ़ कोलेस्ट्रॉल ही नहीं, खराब ओरल हाइजीन भी दिल के दौरे का खतरा बढ़ाती है: अध्ययन
युवाओं में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले
नई दिल्ली: दुनियाभर और भारत में 40 साल से कम उम्र के युवाओं में दिल का दौरा पड़ने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक हार्ट अटैक कोलेस्ट्रॉल जमा होने, खराब खानपान, धूम्रपान और हाई ब्लड प्रेशर से जोड़े जाते थे। लेकिन एक नया अध्ययन बताता है कि खराब ओरल हाइजीन और मुंह के बैक्टीरिया भी हार्ट अटैक का बड़ा कारण बन सकते हैं।
अध्ययन में क्या पाया गया?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में 6 अगस्त 2025 को प्रकाशित फ़िनलैंड और यूके के शोधकर्ताओं के अध्ययन में पाया गया कि विरिडन्स स्ट्रेप्टोकोक्काई नामक मुंह के बैक्टीरिया दिल के दौरे से जुड़े हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने 121 अचानक मृत्यु के मामलों में कोरोनरी प्लाक और 96 सर्जरी मरीजों की धमनियों के नमूने जांचे। लगभग आधे मामलों में बैक्टीरिया का डीएनए मिला। इनमें से 42% कोरोनरी प्लाक और 43% धमनियों के नमूनों में यही बैक्टीरिया सबसे आम पाया गया।
बैक्टीरिया हार्ट अटैक का कारण कैसे बनते हैं?
ये साधारण से बैक्टीरिया धमनियों में जमा प्लाक पर टिक जाते हैं और वहां बायोफिल्म (चिपचिपी परत) बना लेते हैं। यह परत शरीर की इम्यून सिस्टम की पकड़ में नहीं आती।
जब प्लाक फटता है तो बैक्टीरिया के कण अचानक रिलीज़ होकर शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को तेज कर देते हैं। इससे धमनियों में सूजन और दीवारों की कमजोरी बढ़ती है, जिससे अचानक हार्ट अटैक हो सकता है।
प्रयोगशाला परीक्षणों में यह भी पाया गया कि ये बैक्टीरिया टोल-लाइक रिसेप्टर 2 (TLR2) नामक मार्ग को सक्रिय कर देते हैं, जिससे धमनियों में सूजन और बढ़ जाती है।
क्यों ज़रूरी है ओरल हाइजीन?
इस शोध से साफ़ है कि केवल खानपान और लाइफस्टाइल ही नहीं, बल्कि मुंह की सफ़ाई और ओरल हाइजीन भी दिल की सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है।
कैसे रखें अपने दाँत और मुंह स्वस्थ?
- दिन में दो बार कम से कम 2 मिनट तक दांत साफ करें।
- जीभ और दांतों के बीच की सफाई करें, फ्लॉस या वॉटर फ्लॉसर का इस्तेमाल करें।
- मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थ कम खाएं।
- हर 3-4 महीने में टूथब्रश बदलें।
- साल में कम से कम एक बार डेंटिस्ट से चेकअप करवाएं।
- तंबाकू और स्मोकिंग से दूर रहें।
- मसूड़ों से खून आना या कोई और समस्या दिखे तो तुरंत डेंटिस्ट से संपर्क करें।
